सोशल संवाद/डेस्क : सोचिए, आपने घर बैठे वाहन से जुड़ा जरूरी काम ऑनलाइन किया, फीस भी जमा कर दी और उम्मीद थी कि काम जल्द पूरा हो जाएगा। लेकिन महीनों बाद भी जब पोर्टल खोलते हैं, तो वही जवाब मिलता है—आवेदन अभी लंबित है।
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झारखंड में वाहन पोर्टल से जुड़े हजारों आवेदकों की परेशानी कुछ ऐसी ही है। राज्य में 30 हजार से ज्यादा आवेदन अब भी पेंडिंग बताए जा रहे हैं। इनमें वाहन रजिस्ट्रेशन, मालिकाना हक ट्रांसफर, NOC, पता बदलने और वाहन रिकॉर्ड में बदलाव जैसे जरूरी काम शामिल हैं।
कई जिलों में बड़ी संख्या में आवेदन लंबित
विभागीय समीक्षा में सामने आया कि राज्य के कई जिलों में आवेदन लंबे समय से अटके हुए हैं। इनमें सबसे ज्यादा पेंडिंग आवेदन हजारीबाग में 3,460 हैं।
इसके बाद:
- गुमला: 1,994
- देवघर: 1,687
- धनबाद: 1,314
- गिरिडीह: 1,096
- पाकुड़: 1,064
- पूर्वी सिंहभूम: 940
- पश्चिमी सिंहभूम: 628
ऑनलाइन सुविधा के बावजूद दफ्तर के चक्कर
सरकार ने वाहन से जुड़ी कई सेवाओं को ऑनलाइन कर दिया है, ताकि लोगों को परिवहन कार्यालय के चक्कर न लगाने पड़ें। लेकिन आवेदन लंबे समय तक लंबित रहने से लोगों की परेशानी कम होने के बजाय बढ़ती नजर आ रही है।
किसी को वाहन का रजिस्ट्रेशन पूरा होने का इंतजार है, तो किसी का स्वामित्व हस्तांतरण अटका हुआ है। वहीं NOC और पता बदलने जैसे काम भी कई आवेदकों के लिए परेशानी का कारण बने हुए हैं।
बिचौलियों का सहारा लेने को मजबूर लोग
आवेदनों के निपटारे में देरी के कारण लोगों को बार-बार परिवहन कार्यालय जाना पड़ रहा है। इसी वजह से कुछ लोग अपना काम जल्दी कराने के लिए बिचौलियों का सहारा लेने को भी मजबूर हो रहे हैं।
अब सवाल यह है कि विभाग के सख्त निर्देश के बाद इन 30 हजार से ज्यादा लंबित आवेदनों का निपटारा कितनी तेजी से होता है। लोगों को उम्मीद है कि लंबित मामलों पर कार्रवाई तेज होगी और उन्हें बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।









