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झारखंड के औद्योगिक विकास की रफ्तार बढ़ी, 42%  बढ़े श्रमिक

By Riya Kumari

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झारखंड के औद्योगिक विकास की रफ्तार बढ़ी, 42%  बढ़े श्रमिक

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सोशल संवाद / रांची : झारखंड के औद्योगिक विकास की रफ्तार तेज हो चली है. इस मामले में झारखंड ने महाराष्ट्र और तमिलनाडु जैसे राज्यों को भी पीछे छोड़ दिया है. इसका खुलासा राज्य सरकार के उद्योग विभाग की वर्ष 2025-26 के आंकड़ों से हुआ है. इसके अनुसार, राज्य की अर्थव्यवस्था में उद्योग क्षेत्र की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है. इस रिपोर्ट में उत्पादन, निवेश, रोजगार और पूंजी निर्माण जैसे प्रमुख संकेतकों में उल्लेखनीय सुधार दर्ज हुए हैं.

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औद्योगिक क्षेत्र में श्रमिकों की संख्या भी 1.43 लाख से बढ़कर 2.03 लाख हो गयी. यानी करीब 42% वृद्धि दर्ज की गयी. झारखंड देश के सबसे अधिक औद्योगिक रूप से केंद्रित राज्यों में अपनी पहचान और सशक्त कर रहा है. राज्य के सकल राज्य मूल्य वर्धन (जीएसवीए) में उद्योग क्षेत्र का योगदान लगातार 41% से अधिक रहा है, जो अब बढ़कर 45% हो गया है. यह झारखंड को बड़े औद्योगिक राज्यों में शामिल करता है. वर्ष 2023-24 में औद्योगिक हिस्सेदारी मामले में झारखंड केवल छत्तीसगढ़ और ओडिशा से पीछे रहा. लेकिन

महाराष्ट्र, तमिलनाडु और कर्नाटक जैसे बड़े राज्यों से आगे निकल गया. पूर्वी और उत्तर भारत के राज्यों में झारखंड बिहार, बंगाल, हरियाणा और उत्तर प्रदेश से भी बेहतर प्रदर्शन कर रहा है. 2025-26 तक उत्पादन 3.10 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है, जो महामारी के बाद सबसे तेज रिकवरी है. झारखंड के पास देश के कुल खनिज भंडार का लगभग 40% हिस्सा है. कोयला, लौह अयस्क, तांबा और बॉक्साइट

जैसे खनिजों ने राज्य में भारी उद्योगों के विकास की मजबूत नींव रखी है. अब उद्योग का विस्तार ऑटो कंपोनेंट, फूड प्रोसेसिंग, टेक्सटाइल, एथेनॉल और इलेक्ट्रिक वाहन जैसे नये क्षेत्रों तक हो चुका है.

छोटे उद्योगों के बढ़ने से आय के नये स्रोत बने

जानकारी के अनुसार 2025-26 में एमएसएमई पंजीकरण

रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया. इससे रोजगार सृजन और औद्योगिक विविधीकरण को बल मिला है. छोटे उद्योगों के बढ़ने से ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में आय के नये स्रोत बने हैं, जो लगभग 12 लाख से अधिक है. राज्य में कारखानों की संख्या 2014-15 में 2738 से बढ़कर 2025-26 में 2923 हो गयी. हालांकि वृद्धि सीमित रही, लेकिन उत्पादन में तेज उछाल दिखी है. कुल उत्पादन 1.21 लाख करोड़ से बढ़कर 3.10 लाख करोड़ रुपये हो चुका है. जीवीए 26.59 हजार करोड़ से बढ़कर 64.30 हजार करोड़ रुपये हो गया है.

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