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झारखंड का सारंडा जंगल बन रहा नक्सलियों की कब्रगाह, अब बचे सिर्फ 65 माओवादी

By Riya Kumari

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झारखंड
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सोशल संवाद/डेस्क : सारंडा जंगल में 22 व 23 जनवरी को हुई मुठभेड़ के बाद 17 नक्सलियों के शव बरामद किये गये हैं. ऑपरेशन ‘मेगाबुरु’ से माओवादी संगठन को गहरा झटका लगा है. सारंडा में नक्सल गतिविधियों में निश्चित रूप से कमी आयेगी.

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झारखंड में अब 65 नक्सली रह गये हैं. इनमें पलामू में तीन, चतरा में चार, हजारीबाग में दो और लातेहार में चार हैं. नक्सलियों के खिलाफ अभियान जारी रहेगा. उक्त बातें झारखंड की पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) तदाशा मिश्रा और सीआरपीएफ के महानिदेशक (डीजी) ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने कहीं. वे शनिवार को चाईबासा में प्रेस कॉन्फ्रेंस में जानकारी दे रहे थे.

नक्सल मुक्त जिला के लिए चल रहा चौतरफा अभियान

डीजीपी ने कहा कि पश्चिमी सिंहभूम जिला को नक्सल मुक्त बनाने के लिए सारंडा में सीआरपीएफ व जिला पुलिस के संयुक्त नेतृत्व में चौतरफा अभियान चल रहा है. इसमें बड़ी सफलता मिली है. जिला पुलिस, सीआरपीएफ की कोबरा बटालियन और झारखंड जगुआर के जवानों ने मुठभेड़ में भाकपा माओवादी संगठन के शीर्ष नक्सली अनल व अनमोल के दस्ता के 17 नक्सलियों को मार गिराया गया है. उनके पास से कुल 14 हथियार बरामद किये गये हैं.

सुरक्षाबलों को निशाना बनाने के लिए जुटे थे नक्सली

डीजीपी ने कहा कि भाकपा माओवादी संगठन के शीर्ष नेता मिसिर बेसरा, अनमोल, मोछू, अनल, असीम मंडल, अजय महतो, सागेन अंगरिया व अश्विन अपने दस्ता के सदस्यों के साथ के कोल्हान व सारंडा में पुलिस बल को नुकसान पहुंचाने और राष्ट्र विरोधी गतिविधियों के लिए लगातार भ्रमणशील थे. पश्चिमी सिंहभूम जिला पुलिस अधीक्षक (एसपी) अमित रेनू को सटीक जानकारी मिली कि शीर्ष नक्सली अनल व अनमोल के दस्ता छोटानागरा थाना क्षेत्र के कुमडीह और बहदा गांव के आस-पास जंगल व पहाड़ी क्षेत्र सुरक्षाबलों को निशाना बनाने के लिए अप्रिय घटना को अंजाम देने के लिए जुटे हैं.

पुनर्वास नीति का लाभ उठा मुख्य धारा से जुड़ें नक्सली

डीजीपी ने कहा कि नक्सल गतिविधियों में शामिल लोगों से अपील है कि वे झारखंड सरकार के आकर्षक प्रत्यर्पण एवं पुनर्वास नीति का लाभ उठाकर समाज की मुख्यधारा से जुड़ें. हिंसा से कोई लाभ नहीं है.

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