JPSC-JSSC विवाद: हाईकोर्ट के फैसले के बाद छात्रों का प्रदर्शन, पुतला फूंकने निकले युवाओं की पुलिस से झड़प

By Sanjana Das

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JPSC-JSSC विवाद: हाईकोर्ट के फैसले के बाद छात्रों का प्रदर्शन, पुतला फूंकने निकले युवाओं की पुलिस से झड़प

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सोशल संवाद/डेस्क : झारखंड में JPSC-JSSC भर्ती विवाद एक बार फिर सड़क पर पहुंच गया है। परीक्षाएं और भर्ती प्रक्रियाएं रद्द करने के सरकार के फैसले पर हाईकोर्ट की रोक के बाद शुक्रवार शाम रांची में छात्रों ने जोरदार प्रदर्शन किया। JPSC-JSSC Reform Manch के बैनर तले मुख्यमंत्री का पुतला लेकर निकले छात्रों की कई जगह पुलिस से नोकझोंक और धक्का-मुक्की हुई।

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प्रदर्शन के दौरान पुतला छीनने को लेकर भी छात्रों और कुछ युवकों के बीच विवाद हो गया। बाद में स्थिति बिगड़ने पर पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। प्रदर्शन के दौरान कुछ छात्रों की तबीयत बिगड़ गई, जिन्हें इलाज के लिए सदर अस्पताल ले जाया गया।

बापू वाटिका से निकला छात्रों का जुलूस

जानकारी के अनुसार, शुक्रवार शाम करीब 6 बजे सैकड़ों छात्र मोरहाबादी स्थित बापू वाटिका से मुख्यमंत्री का पुतला लेकर निकले। छात्रों का जुलूस कचहरी चौक होते हुए JPSC कार्यालय पहुंचा।

JPSC कार्यालय के पास प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच पहली बार नोकझोंक हुई। इसके बाद पुलिस ने छात्रों को निर्मल महतो चौक होते हुए लाइन टैंक रोड से आगे जाने की अनुमति दी।

स्टेट लाइब्रेरी के पास पुतला छीनने पर हंगामा

जुलूस जैसे ही स्टेट लाइब्रेरी के पास पहुंचा, करीब 8 से 10 युवक कथित तौर पर भीड़ में घुस गए और छात्रों के हाथ से मुख्यमंत्री का पुतला छीनकर भागने लगे।

इससे मौके पर अफरातफरी मच गई। छात्रों ने पीछा कर युवकों को पकड़ लिया और पुतला वापस ले लिया। इस दौरान दो युवकों के साथ मारपीट भी हुई। घटना में शाहबाज नामक युवक के कपड़े फटने की बात सामने आई है।

प्रदर्शनकारी छात्रों ने आरोप लगाया कि पुतला छीनने वाले युवक झामुमो के कार्यकर्ता थे और उन्होंने जुलूस में शामिल छात्राओं के साथ दुर्व्यवहार किया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

हंगामा बढ़ता देख प्रशासन ने हस्तक्षेप कर दोनों युवकों को भीड़ से बाहर निकाला।

शहीद चौक पर पुतला जलाने से रोका

घटना के बाद पुलिस ने छात्रों को अलबर्ट एक्का चौक जाने से रोक दिया और उन्हें शहीद चौक की ओर ले गई। यहां छात्रों ने मुख्यमंत्री का पुतला जलाने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया।

इसके विरोध में छात्र सड़क पर ही धरने पर बैठ गए। पुलिस ने छात्रों को हटाने की कोशिश की, जिसके दौरान दोनों पक्षों के बीच फिर धक्का-मुक्की हुई। इसके बाद पुलिस छात्रों को पीछे करते हुए कचहरी चौक की ओर ले गई।

JNU? No — विश्वविद्यालय गेट के पास पुलिस ने पुतला लिया कब्जे में

कचहरी चौक की ओर जाते समय रांची विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार के पास पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के हाथ से पुतला ले लिया।

इसी दौरान मंच के प्रतिनिधि कुणाल प्रताप को पुलिस ने हिरासत में लेकर वाहन में बैठाया। हालांकि, कुछ दूर ले जाने के बाद उन्हें छोड़ दिया गया।

कचहरी चौक पर प्रदर्शन के दौरान कुणाल प्रताप की तबीयत बिगड़ गई। पुलिस ने उन्हें और छात्र प्रतिनिधि रवींद्र पासवान को ई-रिक्शा से सदर अस्पताल पहुंचाया।

सदर अस्पताल में भी जुटे छात्र, पुलिस ने किया हल्का बल प्रयोग

दोनों छात्र नेताओं के अस्पताल में भर्ती होने की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में छात्र प्रतिनिधि पीयूष के साथ सदर अस्पताल पहुंच गए।

भीड़ बढ़ने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने दोनों मुख्य गेट बंद कर दिए। छात्र अस्पताल के बाहर बैठकर विरोध करने लगे। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने हल्का बल प्रयोग कर भीड़ को वहां से हटाया।

बताया गया कि कुछ छात्र इमरजेंसी वार्ड के अंदर भी चले गए थे, जिन्हें पुलिस ने बाहर निकाला।

हाईकोर्ट की रोक के बाद क्यों भड़के छात्र?

दरअसल, झारखंड सरकार ने कथित अनियमितताओं के मद्देनजर कई JPSC-JSSC परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रियाओं को रद्द करने का फैसला लिया था। सरकार के इस फैसले के खिलाफ मामला हाईकोर्ट पहुंचा।

हाईकोर्ट की ओर से 11वीं से 13वीं JPSC परीक्षा और उससे हुई नियुक्तियों को रद्द करने के सरकार के फैसले पर फिलहाल रोक लगाए जाने के बाद भर्ती आंदोलन से जुड़े छात्रों में नाराजगी बढ़ गई।

प्रदर्शनकारी छात्र भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

अब आगे क्या?

रांची में हुए इस प्रदर्शन के बाद JPSC-JSSC भर्ती विवाद एक बार फिर राजनीतिक और प्रशासनिक चर्चा के केंद्र में है। एक तरफ सरकार कथित अनियमितताओं की जांच की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर परीक्षा और नियुक्तियों से जुड़े उम्मीदवारों का भविष्य अदालत के फैसले पर निर्भर है।

फिलहाल छात्रों के प्रदर्शन, पुलिस कार्रवाई और भर्ती प्रक्रिया को लेकर विवाद आगे भी जारी रहने की संभावना है।

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