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असम में हेलीपैड नहीं मिला, कल्पना सोरेन की रैलियां रद्द; फोन से दिया संदेश, सरकार पर हमला

By Aditi Pandey

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Kalpana Soren rallies cancelled असम

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सोशल संवाद/डेस्क: असम में विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान एक बड़ा राजनीतिक विवाद सामने आया है। झारखंड की गांडेय विधायक कल्पना सोरेन को हेलीपैड की स्वीकृति नहीं मिलने के कारण उनकी निर्धारित चुनावी सभाएं प्रभावित हो गईं। रविवार को उन्हें खुमताई, नहरकटिया और मार्गेरीटा विधानसभा क्षेत्रों में जनसभाओं को संबोधित करना था, लेकिन प्रशासनिक अनुमति नहीं मिलने की वजह से वे इन स्थानों तक नहीं पहुंच सकीं। इस पूरे मामले की जानकारी उन्होंने खुद अपने एक्स (पूर्व ट्विटर) हैंडल के माध्यम से साझा की, जिसके बाद यह मुद्दा तेजी से चर्चा में आ गया।

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कल्पना सोरेन ने अपने पोस्ट में लिखा कि हेलीपैड की स्वीकृति नहीं मिलने के कारण उन्हें अपनी तय सभाओं में शामिल होने में दिक्कत हुई। हालांकि, उन्होंने अपने चुनावी कार्यक्रम को पूरी तरह रद्द नहीं किया और मार्गेरीटा की ओर जाते समय सड़क मार्ग में ही खुमताई और नहरकटिया के लोगों को फोन के जरिए संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने अपने समर्थकों और स्थानीय जनता से संवाद बनाए रखने की कोशिश की और अपने संदेश को पहुंचाने का प्रयास जारी रखा।

इस घटना के बाद कल्पना सोरेन ने असम सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सब उनकी आवाज़ को दबाने और जनता तक उनके संदेश को पहुंचने से रोकने की कोशिश है। उन्होंने कहा कि जिस राजनीतिक लड़ाई को वे असम में आगे बढ़ा रही हैं, उसमें इस तरह की बाधाओं की आशंका पहले से थी। उनके अनुसार, सत्ता में बैठे लोग विपक्ष की आवाज़ को रोकने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं।

उन्होंने अपने बयान में यह भी कहा कि प्रशासनिक अड़चनें उनके हौसले को कमजोर नहीं कर सकतीं। “रास्ते रोके जा सकते हैं, हेलीकॉप्टर रोका जा सकता है, लेकिन जनता के इरादों और जनाक्रोश को नहीं रोका जा सकता,” इस संदेश के जरिए उन्होंने सरकार को सीधे तौर पर चुनौती दी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि मंच छीना जा सकता है, लेकिन आंदोलन की आवाज़ को दबाया नहीं जा सकता।

कल्पना सोरेन ने अंत में भरोसा जताया कि असम की जनता इस पूरे घटनाक्रम को देख रही है और आने वाले समय में इसका जवाब देगी। फिलहाल इस मामले पर असम सरकार या प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन यह मुद्दा चुनावी माहौल में राजनीतिक बहस का बड़ा केंद्र बन गया है।

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