सोशल संवाद/डेस्क : कृष्ण जन्मष्टमी का उत्सव आते ही अंशुमन भगत के लिए विशेष महत्व रखता है। झारखंड के प्रसिद्ध लेखक अंशुमन भगत ने अपनी लेखनी के साथ-साथ कृष्ण भक्ति का भी दिल से पालन किया है। अंशुमन भगत, झारखंड के प्रमुख लेखकों में से एक हैं, जिन्होंने अब तक 5 प्रमुख किताबें लिखी हैं और दिसंबर महीने में एक और पुस्तक की प्रकाशन की घोषणा की है। उनकी लेखनी ने न केवल साहित्यिक दुनिया में पहचान बनाई है, बल्कि भगवान श्री कृष्ण के प्रति उनकी अद्वितीय भक्ति का भी प्रमुख हिस्सा बना है।


अंशुमन भगत के जीवन की खास बात यह है कि उन्होंने बचपन से ही कृष्ण लीला और श्री कृष्ण के चरित्र को पढ़ने का अभ्यास किया है। उन्हें यह जानकर खुशी होती है कि वे आज भी कृष्ण के प्रति वो गहरा समर्पण रखते हैं। उनके लिए कृष्ण केवल एक देवता नहीं है, बल्कि वह उनके जीवन का आधार है। वे कृष्ण के भक्ति में इतने प्रवीण हैं कि वे कहते हैं, “कृष्ण के बिना मैं कुछ नहीं हूं।” उनका मानना है कि कृष्ण ही उनके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है, और जब भी कोई बाधा या विपत्ति उनके सामने आती है, तो उन्हें वे कृष्ण के साथ ही उसे पार करने का साहस और शक्ति मिलती है।
अंशुमन भगत ने कई बार वृंदावन और मथुरा की यात्रा की है, और वहां कृष्ण की भक्ति में पूरी तरह से लीन होते हैं। वे मानते हैं कि वृंदावन और मथुरा की प्राकृतिक सुंदरता और कृष्ण के विचारों के साथ जुड़कर एक अद्वितीय आत्मिक अनुभव प्रदान करते हैं।
इस अर्टिकल के माध्यम से, हमने देखा कि अंशुमन भगत जैसे लेखक भक्ति और लेखन को कैसे जोड़ते हैं, और कृष्ण जी के प्रति उनकी अद्वितीय भक्ति का कैसे आदर्श देते हैं। कृष्ण जन्मष्टमी के इस खास मौके पर, हम सभी कृष्ण भक्तों के लिए यह एक प्रेरणास्पद और सोचने का विषय हो सकता है कि हम भगवान के प्रति अपनी भक्ति को कैसे व्यक्त कर सकते हैं और उनके साथ कैसे एक गहरा संवाद बना सकते हैं।










