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बैंकों से मिलने वाला कर्ज हो सकता है सस्ता:ब्याज दर में 0.25% की हो सकती है कटौती संभव, जानिए कैसे.

By Riya Kumari

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Loans from banks may become cheaper
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सोशल संवाद/डेस्क : आम आदमी को जल्द और राहत मिल सकती है। इस महीने 4 से 6 जून को RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक होनी है। एक्सपर्ट्स के अनुसार इस बार भी ब्याज दारों यानी रेपो रेट में 0.25% कमी होने की पूरी संभावना है। इससे सभी तरह के लोन लेना सस्ता हो जाएगा।

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इससे पहले हुई दो बैठक में 0.50% की कटौती हो चुकी है। इससे रेपो रेट गिरकर 6% पर आ गई है। मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी में 6 सदस्य होते हैं। इनमें से 3 RBI के होते हैं, जबकि बाकी केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त किए जाते हैं।

सभी फैक्टर रेट कट के पक्ष में 

एसबीआई सिक्युरिटीज के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट सनी अग्रवाल ने बताया कि सभी फैक्टर रेट कट के लिए बिल्कुल मुफीद हैं। मानसून सामान्य रहने के आसार हैं। जीडीपी ग्रोथ स्थिर है। महंगाई काबू में है। रिटेल महंगाई जुलाई 2019 के बाद निचले स्तर पर है। पिछली बैठक में आरबीआई गवर्नर ने भी संकेत दिए थे कि महंगाई काबू में रहती है तो दरें और घट सकती हैं। इससे रियल एस्टेट और ऑटो सेक्टर को बूस्ट मिलेगा।

रेपो रेट क्या है, इससे लोन कैसे सस्ता होता है? 

RBI जिस ब्याज दर पर बैंकों को लोन देता है उसे रेपो रेट कहते हैं। रेपो रेट कम होने से बैंक को कम ब्याज पर लोन मिलेगा। बैंकों के लोन सस्ता मिलता है, तो वो अकसर इसका फायदा ग्राहकों को पास कर देते हैं। यानी, बैंक भी अपनी ब्याज दरें घटा देते हैं।

रेपो रेट के घटने से क्या बदलाव आएगा?

 रेपो रेट घटने के बाद बैंक भी हाउसिंग और ऑटो जैसे लोन्स पर अपनी ब्याज दरें कम कर सकते हैं। आपके सभी लोन सस्ते हो सकते हैं और EMI भी घटेगी। ब्याज दरें कम होंगी तो हाउसिंग डिमांड बढ़ेगी। ज्यादा लोग रियल एस्टेट में निवेश कर सकेंगे।

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