सोशल संवाद / डेस्क : नारायण आईटीआई लुपुंगडीह में शहीद दिवस के अवसर पर एक गरिमामय और भावपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान देश की आज़ादी के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले अमर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
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श्रद्धांजलि के साथ कार्यक्रम की शुरुआत
कार्यक्रम की शुरुआत शहीदों के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर और दो मिनट का मौन रखकर की गई। संस्थान के शिक्षक, कर्मचारी और छात्र-छात्राओं ने बड़ी संख्या में भाग लेकर शहीदों को नमन किया।
महान क्रांतिकारियों के जीवन पर डाली गई रोशनी
इस अवसर पर वक्ताओं ने भगत सिंह, शिवराम राजगुरु और सुखदेव थापर के बलिदान और उनके क्रांतिकारी जीवन पर विस्तार से प्रकाश डाला।
बताया गया कि भगत सिंह का जन्म 28 सितंबर 1907 को लायलपुर (अब पाकिस्तान) में हुआ था। वे बचपन से ही देशभक्ति से ओतप्रोत थे और अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ आवाज उठाई। 23 मार्च 1931 को लाहौर में उन्होंने हंसते-हंसते फांसी को स्वीकार किया। उनका नारा “इंकलाब जिंदाबाद” आज भी युवाओं को प्रेरित करता है।
राजगुरु, जिनका जन्म 24 अगस्त 1908 को पुणे में हुआ था, एक निर्भीक क्रांतिकारी थे। उन्होंने भगत सिंह के साथ मिलकर अंग्रेज अधिकारी सांडर्स की हत्या कर ब्रिटिश शासन को कड़ा संदेश दिया।
वहीं, सुखदेव थापर का जन्म 15 मई 1907 को लुधियाना में हुआ था। वे हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन के सक्रिय सदस्य थे और स्वतंत्रता संग्राम में अग्रणी भूमिका निभाई।
देशभक्ति कार्यक्रमों से गूंजा परिसर
कार्यक्रम के दौरान छात्र-छात्राओं ने देशभक्ति गीत, कविता और भाषण प्रस्तुत कर माहौल को देशभक्ति से भर दिया। पूरा परिसर राष्ट्रप्रेम के रंग में रंगा नजर आया।
शहीदों के आदर्शों पर चलने का संकल्प
कार्यक्रम के अंत में सभी ने संकल्प लिया कि वे शहीदों के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाएंगे, देश की एकता और अखंडता को बनाए रखेंगे और उनके बलिदान को कभी व्यर्थ नहीं जाने देंगे।
इस मौके पर एडवोकेट निखिल कुमार, शांति राम महतो, प्रकाश महतो, देवाशीष मंडल, कुलभूषण मंडल, पवन महतो, कृष्णा पद महतो और शिशुमती सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
नारायण आईटीआई में आयोजित शहीद दिवस कार्यक्रम ने युवाओं के बीच देशभक्ति की भावना को और मजबूत किया। शहीदों के त्याग और बलिदान की याद दिलाते हुए यह आयोजन प्रेरणा का स्रोत बना।









