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Union Bank और Bank of India के विलय की तैयारी तेज, बैंकिंग सेक्टर में बड़े बदलाव के संकेत

By Muskan Thakur

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सोशल संवाद/डेस्क : देश के सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकिंग सेक्टर में एक बार फिर बड़े पुनर्गठन की आहट सुनाई दे रही है। Union Bank of India और Bank of India (BoI) के संभावित विलय को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। बैंकिंग सूत्रों के मुताबिक, दोनों बैंकों के बीच मर्जर की प्रक्रिया प्रारंभिक चरण में पहुंच चुकी है और आंतरिक समीक्षा के साथ-साथ ड्यू डिलिजेंस का काम जारी है। यदि सब कुछ तय योजना के अनुसार आगे बढ़ता है, तो यह विलय साल 2026 के अंत तक पूरा हो सकता है। यह कदम न केवल PSU बैंक मर्जर की दिशा में एक अहम फैसला माना जा रहा है, बल्कि इससे देश की बैंकिंग संरचना में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

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सरकार की रणनीति और मर्जर का उद्देश्य

केंद्र सरकार लंबे समय से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की संख्या घटाकर उन्हें अधिक मजबूत और प्रतिस्पर्धी बनाने की नीति पर काम कर रही है। फिलहाल देश में 12 सरकारी बैंक हैं, लेकिन सरकार का लक्ष्य इन्हें घटाकर 4 से 5 बड़े PSU बैंकों तक सीमित करना है। Union Bank–Bank of India के विलय को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। सरकार का मानना है कि बड़े बैंक न केवल पूंजी और संसाधनों के लिहाज से मजबूत होंगे, बल्कि बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और कॉरपोरेट लोन की जरूरतों को भी बेहतर तरीके से पूरा कर सकेंगे। साथ ही, निजी बैंकों और विदेशी बैंकों के साथ प्रतिस्पर्धा में भी ये संस्थान ज्यादा सक्षम बनेंगे।

कितना बड़ा बनेगा नया बैंक

अगर Union Bank और Bank of India का विलय होता है, तो बनने वाला बैंक देश का दूसरा सबसे बड़ा PSU बैंक बन सकता है। वित्त वर्ष 2025 के आंकड़ों के आधार पर संयुक्त बैंक की कुल संपत्ति लगभग 25 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है। एसेट साइज के लिहाज से यह बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के बाद सार्वजनिक क्षेत्र में दूसरे स्थान पर होगा, जबकि समग्र रूप से यह देश के टॉप बैंकों में शामिल हो जाएगा। मार्केट कैपिटलाइजेशन के मामले में भी यह बैंक Bank of Baroda, Canara Bank और Punjab National Bank जैसे बड़े बैंकों को पीछे छोड़ सकता है।

ग्राहकों और बैंकिंग सिस्टम पर असर

बैंक मर्जर का सीधा असर बैंक ग्राहकों पर भी पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस विलय के बाद ग्राहकों को बड़ा शाखा नेटवर्क, बेहतर डिजिटल सेवाएं और ज्यादा मजबूत बैंकिंग सिस्टम का लाभ मिल सकता है। हालांकि, शुरुआती दौर में खातों के माइग्रेशन, IFSC कोड में बदलाव और डिजिटल प्लेटफॉर्म के एकीकरण जैसी चुनौतियां सामने आ सकती हैं। लेकिन लंबे समय में यह मर्जर ग्राहकों के लिए सुविधाजनक साबित हो सकता है।

मर्जर में चुनौतियां क्या होंगी

Union Bank और Bank of India के विलय में सबसे बड़ी चुनौती टेक्नोलॉजी इंटीग्रेशन को माना जा रहा है। दोनों बैंकों के कोर बैंकिंग सिस्टम और डिजिटल प्लेटफॉर्म अलग-अलग हैं, जिन्हें एकीकृत करना समय और संसाधन दोनों की मांग करेगा। इसके अलावा, कर्मचारियों के तालमेल, HR पॉलिसी का समन्वय और संचालन प्रक्रियाओं का एकीकरण भी एक बड़ी चुनौती रहेगा। हालांकि, राहत की बात यह है कि दोनों बैंकों की एसेट क्वालिटी और मुनाफे की स्थिति हाल के वर्षों में बेहतर रही है, जिससे मर्जर की बुनियाद मजबूत मानी जा रही है।

पहले भी हो चुके हैं बड़े PSU बैंक मर्जर

भारत में इससे पहले भी बड़े स्तर पर PSU बैंक मर्जर हो चुके हैं। 2017 से 2020 के बीच 10 सरकारी बैंकों का विलय कर चार बड़े बैंक बनाए गए थे, जिससे सरकारी बैंकों की संख्या 27 से घटकर 12 रह गई थी। उस दौर में भी शुरुआती चुनौतियां सामने आई थीं, लेकिन लंबे समय में इन बैंकों की वित्तीय स्थिति और परिचालन क्षमता में सुधार देखने को मिला।

आगे क्या

Union Bank और Bank of India के संभावित विलय को बैंकिंग सेक्टर में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। अगर यह मर्जर सफल होता है, तो इससे न केवल PSU बैंकों की ताकत बढ़ेगी, बल्कि भारत की अर्थव्यवस्था को भी मजबूत समर्थन मिलेगा। आने वाले महीनों में सरकार और बैंक प्रबंधन की ओर से इस पर आधिकारिक घोषणा होने की संभावना जताई जा रही है।

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