सोशल संवाद/डेस्क: पश्चिम बंगाल में आगामी चुनावों से पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत का अहम बयान सामने आया है। कोलकाता के साइंस सिटी हॉल में आयोजित संघ के शताब्दी वर्ष कार्यक्रम ‘शतायु संघ’ को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने हिंदू समाज की एकजुटता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यदि हिंदू समाज संगठित हो जाए, तो बंगाल की परिस्थितियों में बदलाव आ सकता है।

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संघ प्रमुख ने कहा कि हिंदुओं को आपस में एक-दूसरे की मदद करनी होगी। समाज तभी मजबूत बनेगा, जब लोग संकट के समय एक-दूसरे के साथ खड़े होंगे। इसी क्रम में उन्होंने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों का जिक्र किया और कहा कि भारत सरकार को इस विषय पर गंभीरता से संज्ञान लेना चाहिए और पीड़ित हिंदुओं की सहायता करनी चाहिए।
हालांकि, मोहन भागवत ने यह भी स्पष्ट किया कि राजनीतिक परिवर्तन के बारे में सोचना आरएसएस का कार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि संघ किसी राजनीतिक एजेंडे के तहत काम नहीं करता, बल्कि उसका उद्देश्य सामाजिक परिवर्तन है। संघ समाज को मजबूत बनाने, संस्कार देने और उसे सही दिशा में आगे बढ़ाने के लिए काम करता है।
उन्होंने आगे कहा कि जब समाज बदलेगा, तो वही समाज और मतदाता तय करेगा कि उसके लिए क्या सही है और क्या नहीं। लोकतंत्र में अंतिम निर्णय जनता का होता है और मतदाता को अपने विवेक से निर्णय लेना चाहिए।
आरएसएस के शताब्दी समारोह के तहत देश के प्रमुख महानगरों कोलकाता, दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु में ‘शतायु संघ’ कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। कोलकाता कार्यक्रम के दौरान मोहन भागवत ने दोहराया कि संघ हिंदू समाज के कल्याण और संरक्षण के लिए कार्य करता रहेगा।
उन्होंने यह विश्वास भी जताया कि भारत एक बार फिर विश्वगुरु बनेगा और समाज को उस दिशा में तैयार करना आरएसएस का कर्तव्य है। संघ सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रीय एकता के माध्यम से देश को आगे ले जाने का काम करता रहेगा।










