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NEET विवाद और कोचिंग का दबाव छात्रों की मानसिक परेशानी की बड़ी वजह, सुप्रीम कोर्ट की टास्क फोर्स की रिपोर्ट में खुलासा

By Riya Kumari

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NEET विवाद और कोचिंग का दबाव छात्रों की मानसिक परेशानी की बड़ी वजह, सुप्रीम कोर्ट की टास्क फोर्स की रिपोर्ट में खुलासा
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सोशल संवाद/डेस्क : मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET से जुड़े विवाद, पेपर लीक की घटनाएं और कोचिंग संस्थानों का बढ़ता दबाव छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल रहा है। सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित टास्क फोर्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रतियोगी परीक्षाओं का तनाव और कोचिंग संस्कृति छात्रों में मानसिक परेशानी का प्रमुख कारण बन रहे हैं।

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रिपोर्ट में क्या कहा गया?

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रिपोर्ट के अनुसार, छात्रों पर बेहतर प्रदर्शन का दबाव लगातार बढ़ रहा है। परीक्षा से जुड़ी अनिश्चितता, लंबी तैयारी, प्रतिस्पर्धा और कोचिंग संस्थानों का माहौल चिंता, तनाव और अवसाद जैसी समस्याओं को बढ़ा रहा है। विशेषज्ञों ने छात्रों के लिए बेहतर मानसिक स्वास्थ्य सहायता और काउंसलिंग व्यवस्था की जरूरत बताई है।

कोचिंग संस्कृति पर भी उठे सवाल

टास्क फोर्स ने माना कि देश में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए कोचिंग संस्थानों पर बढ़ती निर्भरता छात्रों के मानसिक और सामाजिक जीवन को प्रभावित कर रही है। रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि शिक्षा व्यवस्था और प्रवेश परीक्षाओं में ऐसे सुधार किए जाएं, जिससे कोचिंग पर निर्भरता कम हो सके।

मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने की जरूरत

रिपोर्ट में स्कूलों, कॉलेजों और कोचिंग संस्थानों में नियमित काउंसलिंग, तनाव प्रबंधन कार्यक्रम और मनोवैज्ञानिक सहायता उपलब्ध कराने की सिफारिश की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा में सफलता के साथ-साथ छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को भी समान महत्व दिया जाना चाहिए।

लगातार बढ़ रही हैं परीक्षा से जुड़ी चुनौतियां

हाल के वर्षों में प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर विवाद, पेपर लीक और अनियमितताओं ने छात्रों की चिंता और बढ़ाई है। शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और भरोसा बढ़ाना भी छात्रों के मानसिक तनाव को कम करने के लिए जरूरी है।

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