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NEET Protest: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, पुलिस कार्रवाई की जांच के लिए बनेगी हाई-पावर्ड कमेटी

By Tamishree Mukherjee

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NEET Protest Supreme Court
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सोशल संवाद / डेस्क : NEET-UG पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था को लेकर हुए छात्र प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बड़ा कदम उठाया। अदालत ने पुलिस की कथित ज्यादती, प्रदर्शनकारियों के साथ व्यवहार और पुलिसकर्मियों के खिलाफ हुई हिंसा समेत पूरे घटनाक्रम की जांच के लिए हाई-पावर्ड कमेटी गठित करने का फैसला किया है।

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मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने संकेत दिया कि कमेटी में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश, हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश और वरिष्ठ सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारियों को शामिल किया जा सकता है। अदालत का उद्देश्य पूरे मामले की तथ्यात्मक जांच कराना और समय-समय पर रिपोर्ट के आधार पर आगे के निर्देश देना है।

पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शन के हर पहलू की होगी जांच

सुप्रीम कोर्ट के सामने प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई को लेकर गंभीर आरोप रखे गए हैं। अदालत द्वारा प्रस्तावित कमेटी पुलिस के कथित अतिरिक्त बल प्रयोग, प्रदर्शनकारियों के साथ व्यवहार और पुलिसकर्मियों के खिलाफ हुई हिंसा सहित विभिन्न पहलुओं की जांच करेगी।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रदर्शन के दौरान महिला प्रदर्शनकारियों के साथ कथित यौन हिंसा और ऑनलाइन उत्पीड़न जैसे आरोपों को भी जांच के दायरे में रखा जा सकता है।

सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत ने संकेत दिया कि जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए और मामले को तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाना जरूरी है।

FIR रद्द करने पर भी सुप्रीम कोर्ट का संकेत

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR को लेकर भी अहम टिप्पणी की। अदालत ने संकेत दिया कि वह संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए उन मामलों में FIR रद्द करने पर विचार कर सकती है, जिनमें स्पष्ट रूप से छात्र शामिल हैं और गंभीर आपराधिक आरोप नहीं हैं।

अदालत ने संबंधित राज्य सरकारों से ऐसी FIR की सूची उपलब्ध कराने को कहा है, जिनमें केवल छात्र प्रदर्शनकारियों के शामिल होने की बात है।

गंभीर आपराधिक मामलों वाले लोगों को अलग रखने की बात

केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने छात्र प्रदर्शनकारियों से जुड़े मामलों में राहत की बात पर सहमति जताई, लेकिन गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों के मामलों को अलग रखने की जरूरत बताई।

पुलिस की ओर से पहले किए गए सत्यापन में प्रदर्शन से जुड़े 2,873 लोगों की पहचान की गई थी। इनमें से 989 लोगों के बारे में आपराधिक रिकॉर्ड होने की बात पुलिस अधिकारियों ने कही थी। हालांकि, इन लोगों की प्रदर्शन के दौरान हिंसा में वास्तविक भूमिका की जांच अलग विषय है।

CJP ने सरकार की मंशा पर उठाए सवाल

छात्र आंदोलन का नेतृत्व करने वाली CJP ने FIR को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं। पार्टी प्रवक्ता सौरव दास ने आरोप लगाया कि सरकार कोर्ट में छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मामलों को खत्म करने की बात तो कर रही है, लेकिन संबंधित FIR की सूची देने में देरी कर रही है।

CJP का कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लिया जाना चाहिए, जबकि प्रदर्शन में हिंसा या अन्य अपराध करने वाले लोगों की अलग से जांच होनी चाहिए।

अब आगे क्या होगा?

सुप्रीम कोर्ट ने कमेटी के गठन को लेकर संबंधित पक्षों से सुझाव मांगे हैं। अदालत के संकेत के मुताबिक, सुझाव मिलने के बाद कमेटी के गठन का औपचारिक आदेश जारी किया जा सकता है।

इस पूरे मामले में अब दो अहम पहलुओं पर नजर रहेगी—पुलिस कार्रवाई की स्वतंत्र जांच और छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR पर सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला।

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