सोशल संवाद / चक्रधरपुर : झारखंड के पश्चिम सिंहभूम जिले में एक बधिर एवं अनाथ युवक की संदिग्ध मौत के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने हाल ही में हुई सुनवाई में पुलिस की धीमी जांच प्रक्रिया पर नाराजगी जताते हुए सख्त निर्देश जारी किए हैं।
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क्या है पूरा मामला?
यह मामला 3 जुलाई 2024 का है, जब खुटपानी प्रखंड के कोट सोना गांव में 26 वर्षीय बधिर एवं अनाथ युवक “टुनटू” की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। इस घटना के बाद थाना मुफस्सिल में कांड संख्या 102/24 के तहत 30 जून 2024 को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) और 201 (सबूत मिटाने) के तहत मामला दर्ज किया गया था।
NHRC ने क्यों जताई नाराजगी?
30 मार्च 2026 को हुई सुनवाई के दौरान NHRC ने पाया कि अब तक पुलिस की ओर से कोई ठोस और संतोषजनक प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई है। इस पर आयोग ने गंभीर असंतोष व्यक्त करते हुए पुलिस अधीक्षक, पश्चिम सिंहभूम को अंतिम चेतावनी दी है।
6 सप्ताह में रिपोर्ट देने का आदेश
आयोग ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि इस मामले में 21 मई 2026 तक अद्यतन और विस्तृत जांच रिपोर्ट अनिवार्य रूप से पेश की जाए। यदि तय समयसीमा के भीतर रिपोर्ट नहीं सौंपी जाती है, तो NHRC अपनी शक्तियों का उपयोग करते हुए सख्त कार्रवाई कर सकता है।
मामला क्यों है संवेदनशील?
यह केस इसलिए भी बेहद गंभीर माना जा रहा है क्योंकि मृतक एक बधिर और असहाय अनाथ युवक था, जिसकी मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हुई। ऐसे मामलों में न्याय और जवाबदेही सुनिश्चित करना प्रशासन की बड़ी जिम्मेदारी बन जाती है।
मानवाधिकार कार्यकर्ता की प्रतिक्रिया
मानवाधिकार कार्यकर्ता बैरम खान ने NHRC के इस कदम को न्याय की दिशा में अहम बताया है। उन्होंने कहा कि:
- दोषियों की जल्द पहचान कर गिरफ्तारी हो
- जांच प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हो
- पीड़ित को समयबद्ध न्याय मिले
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो इस मुद्दे को बड़े स्तर पर उठाया जाएगा।









