सोशल संवाद/डेस्क : बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के मतदान के बीच सियासी माहौल अचानक गर्म हो गया, जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मंगलवार सुबह केंद्रीय मंत्री और जेडीयू के वरिष्ठ नेता ललन सिंह के आवास पर पहुंचे। इस मुलाकात को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है, क्योंकि हाल के दिनों में जेडीयू के भीतर मुख्यमंत्री पद को लेकर उठ रहे सवालों ने पार्टी की एकजुटता पर चर्चा शुरू कर दी थी।

ये भी पढे : Ghatshila By Election 2025: BJP का आरोप– झामुमो कर रहा पुलिस का दुरुपयोग, CM ने की अपील
नीतीश कुमार का यह कदम ऐसे समय में आया है जब गठबंधन की राजनीति में बयानबाज़ी तेज हो गई है। कुछ दिन पहले गृह मंत्री अमित शाह के एक बयान के बाद यह चर्चा शुरू हो गई थी कि चुनाव के बाद मुख्यमंत्री का चयन एनडीए दलों के आपसी निर्णय से होगा। इस बयान ने जेडीयू के भीतर असमंजस पैदा कर दिया था, हालांकि पार्टी नेताओं ने तुरंत स्पष्ट किया कि बिहार में चुनाव नीतीश कुमार के नेतृत्व में ही लड़ा जा रहा है और परिणाम आने के बाद भी वही मुख्यमंत्री रहेंगे।
ललन सिंह ने भी कहा था कि नीतीश कुमार पार्टी के सर्वमान्य नेता हैं और उनके नेतृत्व पर कोई सवाल नहीं उठ सकता। उन्होंने कहा कि “जेडीयू में मतभेद जैसी कोई बात नहीं है, हम सब एकजुट हैं और नीतीश जी के नेतृत्व में ही आगे बढ़ रहे हैं।” यही वजह है कि मुख्यमंत्री का खुद ललन सिंह के घर पहुंचना इस एकजुटता का प्रतीक माना जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, नीतीश कुमार और ललन सिंह के बीच हुई मुलाकात करीब आधे घंटे चली। दोनों नेताओं ने चुनावी रणनीति, पार्टी की संगठनात्मक स्थिति और प्रत्याशियों के प्रदर्शन पर चर्चा की। इसके बाद मुख्यमंत्री सीधे जेडीयू कार्यालय भी पहुंचे, जहां उन्होंने वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक की। यह संकेत था कि पार्टी अंदरूनी तौर पर किसी भी तरह की गुटबाजी को समाप्त करना चाहती है।
दूसरे चरण के मतदान के दौरान यह संदेश देना जेडीयू के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। पार्टी यह नहीं चाहती कि चुनाव के बीच किसी भी तरह की गलतफहमी या असमंजस का माहौल बने। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नीतीश कुमार का यह कदम पार्टी के भीतर आत्मविश्वास और स्थिरता बनाए रखने की दिशा में एक बड़ा संकेत है।
वहीं, भाजपा की ओर से भी स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की गई है। कई वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि नीतीश कुमार ही एनडीए के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार हैं और इसमें किसी तरह का बदलाव नहीं होगा। इस तरह की घोषणाओं से पार्टी कार्यकर्ताओं को भी राहत मिली है, क्योंकि वे अब चुनाव पर पूरी तरह ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।
राजनीतिक पंडितों का कहना है कि नीतीश कुमार और ललन सिंह की यह मुलाकात केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि एक सशक्त राजनीतिक संदेश है — यह संदेश कि जेडीयू में मतभेद की कोई गुंजाइश नहीं है और पार्टी एकजुट होकर एनडीए के साथ चुनावी मैदान में डटी हुई है।
दूसरे चरण की वोटिंग के दौरान बिहार के विभिन्न जिलों में मतदान शांतिपूर्ण ढंग से जारी रहा। सुबह से ही मतदाताओं में उत्साह देखा गया। इस बीच, जेडीयू की ओर से लगातार यह अपील की जा रही है कि लोग अधिक से अधिक संख्या में मतदान करें और लोकतंत्र को मजबूत बनाएं।
कुल मिलाकर, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और ललन सिंह की यह अप्रत्याशित मुलाकात जेडीयू के भीतर चल रही अटकलों पर विराम लगाने का काम करती दिखी। इससे यह संदेश गया कि चुनावी मौसम में पार्टी के शीर्ष नेता एक मंच पर हैं, और जेडीयू पूरी मजबूती के साथ चुनावी मैदान में उतर चुकी है।










