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दिल्ली शराब नीति केस में केजरीवाल-सिसोदिया को नोटिस, हाईकोर्ट में CBI की चुनौती पर बढ़ी कानूनी हलचल

By Muskan Thakur

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सोशल संवाद/डेस्क : दिल्ली की चर्चित आबकारी नीति से जुड़े मामले में एक बार फिर कानूनी हलचल तेज हो गई है। दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले में आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक Arvind Kejriwal और वरिष्ठ नेता Manish Sisodia समेत कुल 23 आरोपियों को नोटिस जारी किया है। अदालत ने सभी पक्षों से इस मामले में अपना जवाब दाखिल करने को कहा है। यह कार्रवाई उस याचिका पर हुई है जिसे केंद्रीय जांच एजेंसी ने निचली अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए दाखिल किया है। अगली सुनवाई के लिए अदालत ने 16 मार्च की तारीख तय की है।

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ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ चुनौती

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इस मामले में पहले राउज एवेन्यू कोर्ट ने फरवरी के अंत में बड़ा फैसला सुनाया था। उस फैसले में अदालत ने दिल्ली के मुख्यमंत्री और पूर्व उपमुख्यमंत्री सहित कुल 23 आरोपियों को आरोपों से बरी कर दिया था।

इसके बाद जांच एजेंसी ने इस फैसले को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। एजेंसी का कहना है कि मामले में की गई जांच और उपलब्ध साक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए निचली अदालत का फैसला सही नहीं है।

हाईकोर्ट ने मांगा आरोपियों का पक्ष

दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान अदालत ने संबंधित सभी आरोपियों को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया। इसके साथ ही अदालत ने ट्रायल कोर्ट द्वारा जांच एजेंसी और उसके अधिकारियों को लेकर की गई कुछ टिप्पणियों पर भी फिलहाल रोक लगा दी है। अदालत का कहना है कि जब तक मामले पर पूरी तरह सुनवाई नहीं हो जाती, तब तक इन टिप्पणियों को लागू नहीं माना जाएगा।

मनी लॉन्ड्रिंग केस की सुनवाई पर भी असर

सुनवाई के दौरान अदालत ने एक और अहम निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि इस मामले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस की सुनवाई फिलहाल स्थगित रखी जाए। अदालत का मानना है कि जब तक उच्च न्यायालय इस मामले में दायर याचिका पर फैसला नहीं कर देता, तब तक निचली अदालत में इस केस से जुड़े अन्य मामलों की सुनवाई आगे नहीं बढ़नी चाहिए।

सरकार और विपक्ष के आरोप-प्रत्यारोप

इस पूरे मामले को लेकर पहले भी राजनीतिक माहौल गरमाता रहा है। ट्रायल कोर्ट से बरी होने के बाद आम आदमी पार्टी और विपक्षी दलों ने आरोप लगाया था कि केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए किया गया।दूसरी ओर, जांच एजेंसियों का कहना है कि मामले की जांच पूरी तरह तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर की गई है और इसमें कई अहम पहलुओं को सामने लाया गया है।

मामला क्यों बना चर्चा का विषय

दिल्ली की आबकारी नीति को लेकर शुरू हुआ यह मामला लंबे समय से सुर्खियों में बना हुआ है। इसमें कथित अनियमितताओं और साजिश के आरोप लगाए गए थे। जांच के दौरान कई राजनीतिक नेताओं और कारोबारियों के नाम सामने आए, जिसके बाद यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया।

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