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अब पेट्रोल नहीं, Ethanol से दौड़ेगी WagonR! Maruti की नई Flex Fuel कार लॉन्च

By Muskan Thakur

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सोशल संवाद/डेस्क : क्या आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल की जगह Ethanol से चलने वाली गाड़ियां सड़कों पर नजर आएंगी? क्योंकि मारुति सुजुकी ने भारत की पहली Flex Fuel वैगनआर पेश कर दी है, जो अब चर्चा का बड़ा विषय बन चुकी है।

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Sunrise Enclave
ASL Motors and Dilip Kia

मारुति सुजुकी की यह नई WagonR FFV यानी Flex Fuel Vehicle ऐसी कार है, जो E20 से लेकर E85 तक के Ethanol मिश्रण वाले ईंधन पर चल सकती है। आसान भाषा में समझें तो इस गाड़ी में पेट्रोल के साथ ज्यादा मात्रा में Ethanol मिलाकर इस्तेमाल किया जा सकता है। दावा तो यहां तक किया जा रहा है कि भविष्य में यह कार सौ प्रतिशत Ethanol पर भी चलने में सक्षम हो सकती है।

देखने में यह वैगनआर लगभग मौजूदा मॉडल जैसी ही लगती है, लेकिन असली बदलाव इसके इंजन और फ्यूल सिस्टम में किया गया है। कंपनी ने इसके इंजन को इस तरह तैयार किया है कि ज्यादा Ethanol वाले ईंधन से भी इंजन को नुकसान न पहुंचे और परफॉर्मेंस बनी रहे।

इस लॉन्च के दौरान केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि Flex Fuel टेक्नोलॉजी भारत के लिए बेहद जरूरी है। उनके मुताबिक इससे पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता कम होगी और देश में बढ़ते प्रदूषण को भी नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। सरकार पहले से ही पुराने और ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को हटाने के लिए Vehicle Scrappage Policy पर काम कर रही है और अब Flex Fuel टेक्नोलॉजी को भी तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है।

नितिन गडकरी ने ऑटो कंपनियों से यह अपील भी की कि वे ऐसी तकनीक विकसित करें, जिससे पुरानी गाड़ियों को भी Flex Fuel व्हीकल में बदला जा सके। अगर ऐसा संभव होता है, तो देश की करोड़ों पुरानी गाड़ियों से होने वाले प्रदूषण को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

मारुति सुजुकी के अधिकारियों के मुताबिक पिछले वित्तीय वर्ष में बिकने वाले ग्रीन व्हीकल्स में कंपनी की हिस्सेदारी लगभग पचास प्रतिशत रही। इससे साफ है कि भारत में लोग अब धीरे-धीरे पर्यावरण के अनुकूल वाहनों की तरफ बढ़ रहे हैं।

सिर्फ कार ही नहीं, सरकार अब दूसरे वैकल्पिक ईंधनों पर भी तेजी से काम कर रही है। नितिन गडकरी ने बताया कि डीजल में पंद्रह प्रतिशत Isobutanol मिलाने की योजना पर विचार किया जा रहा है। इससे डीजल से होने वाले प्रदूषण को कम किया जा सकेगा।

इसके अलावा Sustainable Aviation Fuel यानी SAF को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने दस हजार करोड़ रुपये का बड़ा फंड भी जारी किया है। यह पर्यावरण-अनुकूल हवाई ईंधन होगा, जिसकी कीमत करीब एक सौ पंद्रह रुपये प्रति लीटर बताई जा रही है।

अब सवाल यह है कि क्या आने वाले कुछ सालों में भारत पूरी तरह ग्रीन फ्यूल की तरफ बढ़ जाएगा? क्योंकि जिस तरह सरकार और ऑटो कंपनियां लगातार नए विकल्प ला रही हैं, उससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि भविष्य की गाड़ियां सिर्फ पेट्रोल और डीजल पर निर्भर नहीं रहने वालीं।

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