सोशल संवाद / डेस्क : देश की न्याय व्यवस्था को अधिक प्रभावी और तेज़ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए राष्ट्रपति Droupadi Murmu ने सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने को मंजूरी दे दी है। अब Supreme Court of India में जजों की स्वीकृत संख्या 33 से बढ़ाकर 38 कर दी गई है।

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यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब देश की सर्वोच्च अदालत में लंबित मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। न्यायपालिका पर बढ़ते दबाव को देखते हुए यह निर्णय बेहद अहम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जजों की संख्या बढ़ने से मामलों की सुनवाई में तेजी आएगी और लोगों को समय पर न्याय मिलने में मदद मिलेगी।
केंद्र सरकार और न्यायपालिका दोनों लंबे समय से अदालतों में लंबित मामलों को कम करने के लिए विभिन्न स्तरों पर प्रयास कर रहे हैं। बढ़ती आबादी, जटिल कानूनी विवादों और मुकदमों की बढ़ती संख्या को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट में अतिरिक्त न्यायाधीशों की जरूरत महसूस की जा रही थी।
नई नियुक्तियों के बाद अदालत की कार्यक्षमता में सुधार होने की उम्मीद है। इससे संवैधानिक, आपराधिक और जनहित से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई तेज़ हो सकेगी। साथ ही, न्यायिक प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने में भी मदद मिलेगी।
कानूनी विशेषज्ञों ने इस फैसले को न्यायिक सुधारों की दिशा में बड़ा कदम बताया है। उनका कहना है कि इससे न केवल लंबित मामलों का बोझ कम होगा, बल्कि आम जनता का न्याय व्यवस्था पर भरोसा भी और मजबूत होगा।










