सोशल संवाद / डेस्क : हाल ही में ग्लोबल तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में करीब 10 % तक की बूस्ट देखने को मिली है, जो कि मध्य पूर्व में बढ़ते geopolitical तनाव, विशेषकर Strait of Hormuz (होर्मुज जलडमरूमध्य) के जोखिमों की वजह से है। इस उछाल के साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में पेट्रोल डीज़ल समेत अन्य ऊर्जा उत्पादों की कीमतों पर असर गहराने की संभावना जताई जा रही है।
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क्या हुआ? Crude Oil Price में उछाल
- अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क Brent crude तेल की कीमत लगभग $80 प्रति बैरल तक पहुँच गई, जो हाल के महीनों में उच्च स्तर पर है।
- विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि तनाव और बढ़ता है और Strait of Hormuz बंद रहता है, तो कच्चे तेल की कीमत $100 प्रति बैरल तक भी जा सकती है।
- इसी तरह West Texas Intermediate (WTI) Crude में भी मजबूती दिखाई दे रही है।
होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों महत्वपूर्ण है?
Strait of Hormuz दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। अनुमानित रूप से वैश्विक आपूर्ति का लगभग 20 % तेल इसी मार्ग से जाता है।
इस मार्ग में बाधा या किसी प्रकार की अवरोधना से तेल की आपूर्ति पर सीधा प्रभाव पड़ता है, जिससे बाजार में सप्लाई और मांग का असंतुलन पैदा हो जाता है, और कीमतें तेजी से ऊपर बढ़ सकती हैं।

क्यों बढ़ रहे हैं तेल के दाम?
Geopolitical तनाव और संघर्ष
अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों ने मध्य पूर्व में तनाव को बढ़ा दिया है, जिससे ऊर्जा बाजार में सप्लाई जोखिम की चिंता बढ़ गई है।
Strait of Hormuz में शिपमेंट्स का रुक जाना
कई तेल टैंकरों और ऊर्जा कंपनियों ने सुरक्षा कारणों से Hormuz मार्ग से शिपमेंट्स को रोक दिया है, जिससे सप्लाई चैन प्रभावित हो रही है।
OPEC+ का उत्पादन निर्णय
OPEC+ समूह ने अप्रैल से कुछ मात्रा में उत्पादन बढ़ाने का निर्णय लिया है, लेकिन विश्लेषकों के मुताबिक यह वृद्धि वर्तमान आपूर्ति दबावों को संतुलित करने के लिए पर्याप्त नहीं हो सकती।
वैश्विक और घरेलू प्रभाव
ऊर्जा कीमतों में वृद्धि
तेल की बढ़ती कीमतों का सीधा असर पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतों पर पड़ेगा, जिससे उपभोक्ताओं को अधिक भुगतान करना पड़ सकता है।
भारत सहित तेल-आयातक देशों पर असर
भारत जैसे देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर तेल की उच्च कीमतों का दबाव और महंगाई दर पर असर दिखाई दे सकता है क्योंकि भारत अधिकतर तेल आयात पर निर्भर है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि फिलहाल भारत के पास पर्याप्त तेल भंडार है, लेकिन दीर्घकालिक सप्लाई बाधा होने पर महंगाई, आयात बिल और मुद्रा विनिमय दर पर दबाव पड़ सकता है।
आगे क्या होगा?
विश्लेषकों का कहना है कि यदि मध्य पूर्व में तनाव जारी रहता है और होर्मुज मार्ग पर लंबी अवधि तक बाधा रहती है, तो तेल की कीमतों में नई ऊँचाई देखने को मिल सकती है।
वर्तमान तनाव और राजनीतिक अस्थिरता तेल बाजार के लिए सबसे बड़ा जोखिम बने हुए हैं।
तेल की कीमतों में 10 % से अधिक की उछाल सीधे भू-राजनीतिक तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण सप्लाई मार्ग के जोखिम से जुड़ी है। इससे न केवल अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में कीमतों का दबाव बढ़ रहा है, बल्कि घरेलू अर्थव्यवस्था पर भी इसका प्रभाव दिख सकता है।









