Advertisement 2

57वें ब्रह्मोत्सवम् के पाँचवें दिन शेष वाहन पर विराजमान होकर भगवान वेंकटेश्वर स्वामी ने दिए भक्तों को दिव्य दर्शन

By Riya Kumari

Published :

Follow
57वें ब्रह्मोत्सवम् के पाँचवें दिन शेष वाहन पर विराजमान होकर भगवान वेंकटेश्वर स्वामी ने दिए भक्तों को दिव्य दर्शन
Srinath Advertisement
Dayal Advertisement

Join WhatsApp

Join Now

सोशल संवाद / जमशेदपुर : आंध्र भक्त श्री राम मंदिर, बिष्टुपुर में सम्पन्न हो रहे 57वें वेंकटेश्वर स्वामी ब्रह्मोत्सवम् के पाँचवें दिन रविवार को श्रद्धा, भक्ति एवं आध्यात्मिक उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला। प्रातःकाल पंडित कोंडमाचारुलु के द्वारा भगवान वेंकटेश्वर स्वामी की नित्यकटला पूजा एवं महाअभिषेकम् वैदिक मंत्रोच्चारण के मध्य अत्यंत विधि-विधान से संपन्न कराई गई। मंदिर परिसर भक्तों के “गोविंदा-गोविंदा” और “वेंकट रमणा गोविंदा” के जयघोष से गुंजायमान रहा।

यह भी पढे : स्व. देवेंद्र माझी लीग फुटबॉल टूर्नामेंट का शुभारंभ, खिलाड़ियों से खेल भावना के साथ खेलने की अपील

पूजा के दौरान आचार्यों ने भगवान का पंचामृत, दुग्ध, दधि, घृत, मधु,, नारियल जल, गंगाजल एवं सुगंधित द्रव्यों से अभिषेक किया। इसके पश्चात चंदन, कुमकुम, हल्दी, तुलसी दल एवं विभिन्न प्रकार के सुगंधित पुष्पों से भगवान का विशेष श्रृंगार किया गया। वेदपाठी आचार्यों द्वारा श्रीसूक्त, पुरुषसूक्त, विष्णु सहस्रनाम एवं वैदिक मंत्रों के उच्चारण से सम्पूर्ण वातावरण भक्तिमय हो उठा।

नित्यकटला पूजा में भगवान को नए दिव्य वस्त्र, स्वर्णाभूषण, रत्नजड़ित आभूषण एवं पुष्पमालाएँ अर्पित की गईं। भगवान को विशेष नैवेद्य समर्पित कर विश्व के कल्याण, सुख-समृद्धि एवं शांति की कामना की गई। श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में उपस्थित होकर भगवान के दिव्य अभिषेक एवं अलौकिक श्रृंगार का दर्शन कर पुण्य लाभ प्राप्त किया।

सायंकाल भगवान वेंकटेश्वर स्वामी भव्य शेष वाहन पर विराजमान होकर नगर भ्रमण के लिए निकले। शेष वाहन भगवान विष्णु के अनंत शेषनाग का प्रतीक माना जाता है, जो अनंत शक्ति, संरक्षण, धर्म की स्थापना एवं सृष्टि के संतुलन का संदेश देता है। भगवान का शेष वाहन पर विराजमान होना भक्तों के लिए अत्यंत शुभ एवं मंगलकारी माना जाता है।

शोभायात्रा आंध्र भक्त श्री राम मंदिर, बिष्टुपुर से प्रारंभ होकर बिष्टुपुर बाजार, जुगसलाई, स्टेशन मार्ग होते हुए किताडी स्थित गौरी मंदिर पहुँची। संपूर्ण मार्ग में विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं ने भगवान का पुष्पवर्षा कर भव्य स्वागत किया। महिलाओं ने मंगल आरती उतारी, नारियल अर्पित किए तथा दीप प्रज्ज्वलित कर भगवान की आराधना की। श्रद्धालुओं ने भगवान वेंकटेश्वर स्वामी के दिव्य दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि एवं मंगलमय जीवन की कामना की।

गौरी मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना के उपरांत भगवान की शोभायात्रा आंध्र समिति, बागबेड़ा पहुँची, जहाँ तेलुगु समाज सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान के स्वागत के लिए उपस्थित थे। वैदिक मंत्रोच्चारण, भजन-कीर्तन एवं जयघोष के मध्य भगवान की विशेष आरती की गई तथा भक्तों ने सपरिवार भगवान का आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर सभी श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद का वितरण किया गया।

दर्शन कार्यक्रम सम्पन्न होने के पश्चात भगवान श्री वेंकटेश्वर स्वामी शेष वाहन पर पुनः सड़क मार्ग से बिष्टुपुर स्थित आंध्र भक्त श्री राम मंदिर लौटे। मंदिर पहुँचने पर भगवान की पुनः वैदिक रीति-रिवाजों के अनुसार विशेष पूजा-अर्चना सम्पन्न हुई।

रात्रि में मंदिर के प्रधान आचार्य पंडित कंडूरी आचार्य द्वारा भगवान की पव्वलिम्पु सेवा (शयन सेवा) अत्यंत श्रद्धा एवं वैदिक परंपरा के अनुरूप सम्पन्न कराई गई। इस सेवा में भगवान को रात्रि विश्राम के लिए शयन कराया गया तथा मंगल गीतों एवं वैदिक स्तोत्रों के साथ दिनभर के उत्सव का समापन हुआ।

पूरे दिन मंदिर एवं शोभायात्रा मार्ग पर भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी रही। ब्रह्मोत्सवम् के पाँचवें दिन का यह आयोजन श्रद्धा, भक्ति, अनुशासन एवं दक्षिण भारतीय धार्मिक परंपराओं की भव्यता का अद्भुत उदाहरण बन गया। आयोजन समिति ने सभी श्रद्धालुओं, स्वयंसेवकों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए आगामी उत्सवों में भी अधिकाधिक संख्या में सहभागिता का आग्रह किया।

YouTube Join Now
Facebook Join Now
Social Samvad MagazineJoin Now
---Advertisement---

Social Samvad Creator
Exit mobile version