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राष्ट्रीय सम्मान से गौरवान्वित हुआ सरायकेला, छऊ कलाकार कुना सामल और शिल्पकार सुशांत महापात्र का अभिनंदन

By Riya Kumari

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राष्ट्रीय सम्मान से गौरवान्वित हुआ सरायकेला, छऊ कलाकार कुना सामल और शिल्पकार सुशांत महापात्र का अभिनंदन
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सोशल संवाद / सरायकेला: सरायकेला की समृद्ध कला एवं सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर मिली बड़ी पहचान का जश्न रविवार को उत्कलमणि आदर्श पाठागार भवन में मनाया गया। इस अवसर पर आयोजित भव्य सम्मान समारोह में सरायकेला छऊ नृत्य के युवा कलाकार कुना सामल और छऊ मुखौटा निर्माण कला के प्रतिष्ठित शिल्पकार सुशांत कुमार महापात्र का अभिनंदन किया गया।

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गौरतलब है कि छऊ नृत्य के प्रतिभाशाली कलाकार कुना सामल को कला क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए देश के प्रतिष्ठित बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार से सम्मानित किए जाने की घोषणा की गई है। वहीं सरायकेला छऊ की विशिष्ट पहचान मानी जाने वाली मुखौटा निर्माण कला को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने वाले शिल्पकार सुशांत कुमार महापात्र का चयन प्रतिष्ठित संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार के लिए किया गया है।

सरायकेला की सांस्कृतिक विरासत को मिला राष्ट्रीय सम्मान

सम्मान समारोह में क्लब के वरिष्ठ सदस्य, स्थानीय बुद्धिजीवी, गणमान्य नागरिक और युवा बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सभी ने दोनों कलाकारों को पुष्पगुच्छ, शॉल एवं सम्मान प्रतीक भेंट कर उनकी उपलब्धियों पर खुशी जताई।

वक्ताओं ने कहा कि यह सम्मान केवल दो कलाकारों की व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि सरायकेला की समृद्ध कला, संस्कृति और परंपरा की राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान है। इससे क्षेत्र के युवा कलाकारों और कला साधकों को नई प्रेरणा मिलेगी।

छऊ कला के संरक्षण और संवर्धन पर जोर

कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में सरायकेला छऊ नृत्य से जुड़े कलाकारों, मुखौटा निर्माताओं, बांसुरी वादकों, वाद्य यंत्र कलाकारों और अन्य लोक कला साधकों को भी राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान और पहचान मिलेगी।

उन्होंने कहा कि सरायकेला छऊ नृत्य और मुखौटा कला झारखंड की अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर हैं, जिनके संरक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं।

कला साधकों को मिला सम्मान, बढ़ा गौरव

समारोह के अंत में उपस्थित लोगों ने दोनों सम्मानित कलाकारों को शुभकामनाएं देते हुए उनकी उपलब्धियों को पूरे सरायकेला जिले के लिए गर्व का विषय बताया। साथ ही छऊ नृत्य एवं मुखौटा कला के संरक्षण, संवर्धन और नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास जारी रखने का संकल्प भी लिया।

यह सम्मान समारोह सरायकेला की सांस्कृतिक पहचान, कला परंपरा और कलाकारों के योगदान को सम्मानित करने का एक यादगार अवसर साबित हुआ।

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