सोशल संवाद / नई दिल्ली : कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में पार्टी अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने 16 अप्रैल से महिला आरक्षण बिल पर बुलाए गए संसद के विशेष सत्र को चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन बताते हुए कहा कि मोदी सरकार इसी महीने होने वाले विधानसभा चुनावों में इसका राजनीतिक लाभ उठाना चाहती है। साथ ही उन्होंने परिसीमन प्रस्ताव पर गहरे विचार विमर्श की जरूरत बताई है।
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कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बैठक में अपने शुरुआती वक्तव्य में मोदी सरकार पर जमकर हमला बोला। विशेष सत्र में प्रस्तावित संविधान संशोधनों पर चर्चा के लिए नई दिल्ली के इंदिरा भवन में बुलाई गई इस बैठक में कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, महासचिव प्रियंका गांधी, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटका और तेलंगाना के मुख्यमंत्रियों समेत कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य भी मौजूद थे।
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि मोदी सरकार लंबे समय तक चुप रहने के बाद महिला आरक्षण पर अचानक सक्रिय हो गई है। इसी कड़ी में 16 से 18 अप्रैल के बीच संसद की बैठक होने जा रही है।
खरगे ने बताया कि इस संबंध में अभी तक उनके पास सरकार की ओर से कोई औपचारिक प्रस्ताव नहीं आया है। प्रधानमंत्री के एक लेख के जरिए ही कुछ बातें पता चली हैं। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार इस विधेयक को इस सत्र में पास कराकर इसी महीने होने वाले विधानसभा चुनावों में इसका श्रेय लेने के साथ-साथ लाभ उठाना चाहती है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने आगे कहा कि जानकारी के अनुसार सरकार महिला आरक्षण को 2029 के चुनावों से लागू करना चाहती है। इसके अलावा लोकसभा और विधानसभाओं की मौजूदा सीटों को 50 प्रतिशत बढ़ाना चाहती है। सरकार लोकसभा की सीटों को 543 से बढ़ाकर 816 करना चाहती है। विधानसभाओं में भी इसी अनुपात में बढ़ोतरी होगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस परिसीमन प्रस्ताव के गंभीर परिणाम होंगे, इसलिए इसपर बहुत गहरे विचार विमर्श की जरूरत है।
उन्होंने बताया कि कांग्रेस और विपक्षी दलों ने संसदीय कार्य मंत्री को तीन बार लिखा कि 29 अप्रैल को पश्चिम बंगाल में मतदान के आखिरी दिन के बाद सरकार सर्वदलीय बैठक बुलाए और इस मुद्दे पर गंभीरता से चर्चा करे। लेकिन बार-बार अनुरोध के बाद भी सरकार ने चुनावी लाभ के लिए विपक्ष की बातों को नहीं माना। खरगे ने इसे चुनावी आचार संहिता का उल्लंघन बताया और दोहराया कि चुनाव आयोग गृह मंत्रालय के अधीनस्थ कार्यालय की तरह काम कर रहा है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि संसद की यह बैठक ऐसे समय में बुलाई गई है जब तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों के चलते इन राज्यों के अधिकांश सांसद अपने-अपने क्षेत्रों में व्यस्त हैं। उन्होंने मोदी सरकार पर लगातार लोकतंत्र को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए कहा कि मनमाने फैसले लेना इसकी आदत बन गई है।
बैठक में खरगे ने महिला सशक्तिकरण में कांग्रेस के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि महिला आरक्षण का विषय कांग्रेस की सामाजिक न्याय की धारा का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने याद दिलाया कि पंचायती राज संस्थाओं और शहरी स्थानीय निकायों में महिलाओं के एक-तिहाई आरक्षण को कांग्रेस ने साकार किया था। इसकी पहल पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने की थी। इसी कारण आज लगभग 14.5 लाख महिलाएं निर्वाचित प्रतिनिधि हैं। उन्होंने कहा कि 100 साल पहले सरोजिनी नायडू कांग्रेस की पहली भारतीय महिला अध्यक्ष बनी थीं। तब से लेकर कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी तक कई नायिकाओं ने कांग्रेस का नेतृत्व किया है।
उन्होंने आगे कहा कि महिला आरक्षण की दिशा में कांग्रेस लगातार सक्रिय रही है और इसे लागू करने के लिए मोदी सरकार पर लगातार दबाव बनाया। सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने कई पत्र लिखे। 2023 में हैदराबाद कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में पार्टी ने इस मुद्दे पर गहन चर्चा की थी और मोदी सरकार से विशेष सत्र बुलाकर महिला आरक्षण बिल पास करने की अपील की गई थी। खरगे ने बताया कि 23 सितंबर 2023 को सदन में संविधान संशोधन विधेयक पर बोलते हुए उन्होंने इसे तुरंत लागू करने की मांग की थी, लेकिन सरकार ने उस समय तय किया था कि इसे परिसीमन और जनगणना के बाद ही लागू किया जाएगा। खरगे ने बताया कि कार्यसमिति की बैठक के बाद कांग्रेस विपक्षी दलों के साथ भी चर्चा करके सामूहिक रणनीति बनाएगी।









