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भीषण गर्मी के कारण बढ़े मरीज, एमजीएम अस्पताल फुल; वार्ड के बाहर फर्श और स्ट्रेचर पर हो रहा इलाज

By Riya Kumari

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भीषण गर्मी के कारण बढ़े मरीज, एमजीएम अस्पताल फुल; वार्ड के बाहर फर्श और स्ट्रेचर पर हो रहा इलाज
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सोशल संवाद / जमशेदपुर : आसमान से बरसती आग और भीषण लू ने जमशेदपुर के लोगों को बेहाल कर दिया है। गर्मी के कारण बीमार पड़ने वाले मरीजों की संख्या में अचानक भारी इजाफा हुआ है। हालात यह हैं कि कोल्हान के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एमजीएम मेडिकल कॉलेज में अब तिल रखने की जगह नहीं बची है। वार्ड फुल हो चुके हैं और मजबूरी में गंभीर मरीजों का इलाज वार्ड के बाहर गैलरी की फर्श और स्ट्रेचर पर किया जा रहा है।

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सोमवार को इमरजेंसी में स्ट्रेचर नहीं मिलने के कारण एक मरीज करीब एक घंटे तक वाहन में ही दर्द से तड़पती रही। बाद में परिजन कोकीत इमरजेंसी तक पहुंचे, जहां इलाज शुरू हो सका। पटमदा निवासी मौसमी की तबीयत अचानक बिगड़ने पर परिजन उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए थे। वहां से गंभीर स्थिति देखते हुए डॉक्टरों ने एमजीएम रेफर कर दिया। लेकिन अस्पताल पहुंचने पर न वार्ड में जगह मिली और न ही स्ट्रेचर। मरीज की हालत बिगड़ने पर परिजन खुद सहारा देकर उन्हें वार्ड तक ले गए।

एमजीएम मेडिकल कॉलेज अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल और पेपरलेस बनाने की दिशा में नई व्यवस्था लागू कर दी गई है। सोमवार से ओपीडी में इलाज के लिए मरीजों के आधार कार्ड और मोबाइल नंबर को अनिवार्य कर दिया गया है। अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि इससे इलाज प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित होगी, लेकिन ग्रामीण मरीजों के लिए यह नई परेशानी बन गई है।

सोमवार को पटमदा की सावित्री सिंह अपने पति के इलाज के लिए अस्पताल पहुंचीं, लेकिन आधार कार्ड और मोबाइल नंबर नहीं होने के कारण उनका पंजीकरण नहीं हो सका। करीब 40 मिनट लाइन में खड़े रहने के बाद एक होमगार्ड जवान की पहल पर उनका पर्चा बन पाया। अस्पताल की ओपीडी में रोज करीब 1200 मरीज आते हैं,

आखिर अतिरिक्त बेड की व्यवस्था पहले से क्यों नहीं की जाती ?

हर साल गर्मी में मरीजों की संख्या बढ़ती है, इसके बावजूद अस्पताल प्रबंधन ने अतिरिक्त बेड और अस्थायी वार्ड की व्यवस्था पहले से क्यों नहीं की? आम बीमारी में भी मरीजों को चार-पांच दिन तक भर्ती रखना पड़ता है, जबकि दूसरे अस्पतालों में एक-दो दिन में छुट्टी मिल जाती है। ऐसे में लगातार बढ़ते मरीजों का दबाव एमजीएम की तैयारियों की पोल खोल रहा है।

इलाज हुआ डिजिटल, अब आधार व मोबाइल नंबर अनिवार्य

एमजीएम मेडिकल कॉलेज अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल और पेपरलेस बनाने की दिशा में नई व्यवस्था लागू कर दी गई है। सोमवार से ओपीडी में इलाज के लिए मरीजों के आधार कार्ड और मोबाइल नंबर को अनिवार्य कर दिया गया है। अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि इससे इलाज प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित होगी, लेकिन ग्रामीण मरीजों के लिए ।

यह नई परेशानी बन गई है। सोमवार को पटमदा की सावित्री सिंह अपने पति के इलाज के लिए अस्पताल पहुंचीं, लेकिन आधार कार्ड और मोबाइल नंबर नहीं होने के कारण उनका पंजीकरण नहीं हो सका। करीब 40 मिनट लाइन में खड़े रहने के बाद एक होमगार्ड जवान की पहल पर उनका पर्चा बन पाया। अस्पताल की ओपीडी में रोज करीब 1200 मरीज आते हैं।

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