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72 घंटे बाद भी मरीज का सही ब्लड ग्रुप स्पष्ट नहीं, सदर अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल

By Tamishree Mukherjee

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Patient's correct blood group remains unclear even after 72 hours
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सोशल संवाद / चाईबासा: सदर अस्पताल, चाईबासा में इलाजरत मरीज सुरेंद्र बोयपाई के ब्लड ग्रुप को लेकर उत्पन्न विवाद लगातार गंभीर होता जा रहा है। घटना के 72 घंटे से अधिक समय बीत जाने के बावजूद गठित जांच समिति अब तक यह स्पष्ट नहीं कर पाई है कि मरीज का वास्तविक ब्लड ग्रुप क्या है। इस स्थिति ने पूरे जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था, ब्लड बैंक प्रबंधन तथा मरीज सुरक्षा प्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है।

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प्राप्त जानकारी के अनुसार मरीज सुरेंद्र बोयपाई को 11 जून 2026 को सदर अस्पताल, चाईबासा के ब्लड बैंक से उपलब्ध कराए गए रक्त का ट्रांसफ्यूजन किया गया था। किंतु बाद में मरीज के ब्लड ग्रुप को लेकर अलग-अलग जानकारियां सामने आने लगीं, जिससे पूरे मामले पर संदेह उत्पन्न हो गया। सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि जांच समिति अब तक किसी स्पष्ट निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी है।

एंटी करप्शन ऑफ इंडिया के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष धी. रामहरि पेरियार ने कहा कि एक व्यक्ति का ब्लड ग्रुप कोई बदलने वाली चीज नहीं है। यदि स्वास्थ्य विभाग और जांच समिति ही यह निर्धारित नहीं कर पा रही है कि मरीज का सही ब्लड ग्रुप क्या था, तो यह केवल तकनीकी त्रुटि का विषय नहीं बल्कि पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था की जवाबदेही पर गंभीर सवाल है।

उन्होंने कहा कि जनता जानना चाहती है कि यदि ब्लड ग्रुप को लेकर भ्रम की स्थिति थी, तो मरीज को रक्त किस आधार पर जारी किया गया? रक्त चढ़ाने से पूर्व क्रॉस-मैचिंग और सत्यापन की प्रक्रिया कैसे पूरी की गई? जांच समिति अब तक स्पष्ट रिपोर्ट देने में असमर्थ क्यों है? और क्या किसी स्तर पर हुई चूक को छिपाने का प्रयास किया जा रहा है?
धी. पेरियार ने कहा कि रक्त चढ़ाना चिकित्सा विज्ञान की सबसे संवेदनशील प्रक्रियाओं में से एक है। इसमें किसी भी प्रकार की त्रुटि मरीज के जीवन के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न कर सकती है। इसलिए इस पूरे मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी एवं समयबद्ध जांच आवश्यक है।

इसी संदर्भ में उन्होंने उपायुक्त, पश्चिमी सिंहभूम को लिखित शिकायत सौंपकर मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। साथ ही ब्लड बैंक रिकॉर्ड, क्रॉस-मैचिंग रिपोर्ट, लैब जांच रिपोर्ट तथा संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका की जांच कर दोषियों पर कठोर कार्रवाई करने की मांग की है।

उन्होंने कहा कि यह मामला केवल एक मरीज का नहीं बल्कि पूरे जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था की विश्वसनीयता का प्रश्न है। अस्पतालों में आने वाले लोग आंकड़े नहीं होते, बल्कि उनकी जिंदगी और सुरक्षा सर्वोपरि होती है। यदि कहीं कोई चूक हुई है तो सच जनता के सामने आना चाहिए और दोषियों को जवाबदेह बनाया जाना चाहिए।

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