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अस्थाई कर्मचारियों को भी पेंशन पाने का हक : कोर्ट

By Tamishree Mukherjee

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Permanent employees also entitled to pension: Court
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सोशल संवाद / रांची : झारखंड हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि अस्थाई कर्मचारियों को भी पेंशन पाने का है। केवल सेवा नियमित (रेगुलर) नहीं होने के आधार पर किसी कर्मचारी को पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों से वंचित नहीं किया जा सकता। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने गुरुवार को मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि यदि किसी कर्मचारी ने वर्कचार्ज या अस्थाई स्थापना में 15 वर्ष से अधिक सेवा दी है तो वह पेंशन का हकदार है।

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अदालत ने भवन निर्माण विभाग के सेवानिवृत्त कर्मचारी परमेश्वर साह की 30 वर्ष की सेवा को पेंशन के लिए जोड़ने का निर्देश देते हुए सरकार को आठ सप्ताह के भीतर सभी सेवानिवृत्ति लाभों का भुगतान करने का आदेश दिया। इस संबंध में परमेश्वर साह ने याचिका दायर की थी। प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता सौरभ शेखर और अनुराग कुमार ने अदालत को बताया कि प्रार्थी की नियुक्ति 4 जनवरी 1986 को भवन निर्माण विभाग में वर्कचार्ज आधार पर चौकीदार/मजदूर के रूप में हुई थी। फरवरी 2021 में सेवानिवृत्त होने के बाद उन्हें पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य सेवानिवृत्ति लाभ नहीं दिए गए। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की।

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि प्रार्थी ने 30 वर्षों तक नियमित वेतनमान पर स्वीकृत पद के विरुद्ध सेवा दी। केवल विभाग द्वारा समय पर नियमितीकरण नहीं किए जाने का खामियाजा कर्मचारी को नहीं भुगतना पड़ सकता। यदि प्रशासन की लापरवाही से नियमितीकरण नहीं हुआ, तो इससे कर्मचारी के वैधानिक अधिकार समाप्त नहीं हो जाते।

कोर्ट ने सुप्रीम के फैसले का दिया हवाला

अदालत ने अपने फैसले में झारखंड हाईकोर्ट की फुल बेंच के राम प्रसाद सिंह बनाम राज्य सरकार मामले और सुप्रीम कोर्ट के तलसीभाई धनजीभाई पटेल तथा भिखानी देवी मामलों के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि वर्कचार्ज कर्मचारियों को अस्थायी सरकारी कर्मचारी का दर्जा प्राप्त है। ऐसे कर्मचारियों ने यदि 15 वर्ष या उससे अधिक सेवा दी है, तो वे पेंशन, ग्रेच्युटी, अवकाश नकदीकरण और अन्य सेवानिवृत्ति लाभ पाने के अधिकारी है, भले ही उनकी सेवा औपचारिक रूप से नियमित न हुई हो।

राज्य सरकार ने क्या तर्क दिया

राज्य सरकार ने अदालत में 17 जुलाई 2023 के कैबिनेट निर्णय का हवाला देते हुए तर्क दिया कि पेंशन का लाभकेवल नियमित किए गए वर्कचार्ज कर्मचारियों को मिल सकता है। लेकिन हाईकोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया और कहा कि यह निर्णय कर्मचारी के संवैधानिक और वैधानिक अधिकारों पर रोक नहीं लगा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता की पूरी 30 वर्ष की सेवा पेंशन की गणना में शामिल की जाएगी।

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