सोशल संवाद / डेस्क : मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है। याचिका में Special Intensive Revision (SIR) के दौरान मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए स्वतंत्र SIT गठित करने की मांग की गई है। याचिका अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की ओर से दायर की गई है।
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13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाने की जांच की मांग
याचिका में दावा किया गया है कि SIR प्रक्रिया के दौरान करीब 13 करोड़ मतदाताओं के नाम विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की मतदाता सूचियों से हटाए गए। याचिकाकर्ता ने इस प्रक्रिया की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में न्यायिक जांच आयोग या SIT गठित करने की मांग की है। इसमें साइबर सुरक्षा और IT विशेषज्ञों को भी शामिल करने का प्रस्ताव रखा गया है।
चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों का भी हवाला
याचिका में The Indian Express की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने SIR से जुड़े कुछ फैसलों पर आपत्ति दर्ज की थी। रिपोर्टों के अनुसार, दोनों आयुक्तों ने कई मौकों पर लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं। हालांकि, निर्वाचन आयोग ने कहा है कि आयोग के भीतर अलग-अलग विचार और टिप्पणियां संस्थागत विचार-विमर्श का सामान्य हिस्सा हैं तथा उसके आदेश पूर्ण आयोग के निर्णयों के आधार पर जारी हुए हैं।
Form 6 में बदलाव को लेकर भी सवाल
याचिका में मतदाता पंजीकरण से जुड़े Form 6 में कथित बदलाव का भी मुद्दा उठाया गया है। याचिकाकर्ता ने मांग की है कि यदि ये बदलाव निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया के अनुरूप नहीं किए गए हैं तो उन्हें रद्द किया जाए और मूल वैधानिक Form 6 को बहाल किया जाए।
CEC समेत अन्य अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
याचिका में CEC ज्ञानेश कुमार के अलावा वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त मनीष गर्ग और निर्वाचन आयोग की IT से जुड़ी अधिकारी सीमा खन्ना समेत अन्य जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की मांग भी की गई है। याचिकाकर्ता ने Representation of the People Act, 1950 की धारा 32 के तहत शिकायत और अभियोजन शुरू करने का निर्देश देने की मांग की है।
याचिका में ECINet और ERONet से जुड़े डेटा, सर्वर लॉग और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने की मांग भी की गई है, ताकि SIR से संबंधित प्रक्रियाओं की जांच की जा सके। फिलहाल ये सभी मांगें याचिका में की गई हैं; इनके संबंध में सुप्रीम कोर्ट का अंतिम निर्णय आना बाकी है।












