पीरियड्स में पेड लीव की याचिका सुप्रीम कोर्ट में खारिज:CJI बोले– कानून बनाया तो महिलाओं को कोई काम नहीं देगा

By Riya Kumari

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पीरियड्स में पेड लीव की याचिका सुप्रीम कोर्ट में खारिजCJI बोले–

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सोशल संवाद/डेस्क : सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को देशभर में महिला छात्रों और कामकाजी महिलाओं को पीरियड्स में पेड लीव देने की मांग वाली याचिका खारिज हो गई। CJI सूर्यकांत ने कहा कि ऐसी याचिकाएं अनजाने में महिलाओं के बारे में बनी रूढ़ियों को और मजबूत कर सकती हैं। यह कानून बनाया तो महिलाओं को कोई काम नहीं देगा, उनका करियर खत्म हो जाएगा।

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CJI ने कहा- ये याचिकाएं डर पैदा करने के लिए, महिलाओं को हीन दिखाने के लिए, यह जताने के लिए दायर की जाती हैं कि पीरियड्स उनके साथ होने वाली कोई बुरी चीज है। यह उनका पॉजिटिव राइट है, लेकिन उस नियोक्ता के बारे में सोचिए, जिसे पेड लीव देनी होगी।

CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने सुनवाई के दौरान मेंस्ट्रुअल लीव को अनिवार्य बनाने के संभावित सामाजिक परिणामों के बारे में चिंता जाहिर की।

कोर्ट ने याचिकाकर्ता के अधिकार क्षेत्र पर भी सवाल उठाया और कहा कि इस मामले को लेकर खुद कोई महिला कोर्ट में नहीं आई है।

पेड मेंस्ट्रुअल लीव पर CJI के कमेंट्स

मान लीजिए आप पूरे प्राइवेट सेक्टर को महीने में एक बार छुट्टी लेने का अधिकार देते हैं तो यह उनके विकास के लिए नुकसानदायक हो सकता है। आपको वर्क प्लेस पर बनने वाली मानसिकता का अंदाजा नहीं है।

इस पर कानून बना तो महिलाओं के करियर को होने वाले नुकसान का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाएगा। कोई भी उन्हें जिम्मेदारियां नहीं देगा, यहां तक कि ज्यूडीशियल सर्विस में भी, उन्हें सामान्य मुकदमे नहीं सौंपे जाएंगे।

हम निर्देश देते हैं कि सक्षम प्राधिकारी सुप्रीम कोर्ट के24 फरवरी 2023 और 8 जुलाई 2024 के आदेशों के जरिए दिए गए निर्देशों पर विचार करे और एक नीति तैयार करे।

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