सोशल संवाद / जमशेदपुर : मानगो नगर निगम में अधिकारों और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय द्वारा नगर निगम के अपर नगर आयुक्त और उप नगर आयुक्त के साथ बैठक कर अधिकारों को लेकर सवाल उठाए जाने के बाद मेयर सुधा गुप्ता ने पलटवार किया है।
यह भी पढे : शिक्षक का सम्मान, शिक्षा का उत्थान: 6 सितंबर को जमशेदपुर में होगा शिक्षा पर सेमिनार
मेयर सुधा गुप्ता ने कहा कि “कार्यकारी अधिकार तो विधायक सरयू राय के पास भी नहीं है।” उन्होंने कहा कि विधायक अपने विधानसभा क्षेत्र की समस्याओं, विकास योजनाओं और कार्यों की प्रगति को लेकर अधिकारियों के साथ बैठक कर सकते हैं, लेकिन नगर निगम के अधिकारियों को उनके अधिकार समझाने के नाम पर संस्थागत व्यवस्था में हस्तक्षेप करना उचित नहीं है।
‘विधायक का काम निगरानी करना, निगम चलाना नहीं’
सुधा गुप्ता ने कहा कि संवैधानिक व्यवस्था में विधायिका और कार्यपालिका की भूमिकाएं अलग-अलग हैं। विधायक का मुख्य काम विधानसभा में कानून बनाना, बजट पर चर्चा और मतदान करना तथा सवालों और प्रस्तावों के जरिए सरकार की जवाबदेही तय करना है।
उन्होंने कहा कि विधायक निधि के तहत योजनाओं की अनुशंसा की जा सकती है, लेकिन योजनाओं का प्रशासनिक क्रियान्वयन संबंधित विभाग और अधिकारी करते हैं। उनके मुताबिक विधायक के पास नगर निगम का सीधा प्रशासनिक नियंत्रण नहीं होता।
‘नगर निगम में अनावश्यक हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं’
मेयर ने कहा कि नगर निगम की अपनी संस्थागत व्यवस्था है और अधिकारी कानून व निर्धारित प्रक्रिया के तहत काम करते हैं। उन्होंने कहा कि विधायक सड़क, पानी, सफाई, सीवरेज जैसी जनसमस्याओं को लेकर समीक्षा बैठक कर सकते हैं, लेकिन अधिकारियों को यह बताना कि किस निर्वाचित पदाधिकारी के पास कितना अधिकार है, उचित नहीं है।
सुधा गुप्ता ने आरोप लगाया कि मानगो नगर निगम में जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच जो सकारात्मक माहौल बनाया गया था, उसमें दरार डालने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि इसका सीधा असर विकास कार्यों पर पड़ सकता है।
15 महीने की कार्यप्रणाली पर भी उठाए सवाल
मेयर ने विधायक सरयू राय की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि करीब 15 महीनों तक नगर निगम की कार्यप्रणाली और अधिकारियों पर सवाल उठाए जाते रहे। उन्होंने पूछा कि “टेंडर से जुड़े निर्णयों के बाद अचानक सब कुछ ठीक कैसे हो गया?”
उन्होंने कहा कि यदि किसी टेंडर में गड़बड़ी है तो दस्तावेज सामने रखे जाएं और नियम के अनुसार जांच कराई जाए। जनता के पैसे से जुड़े किसी भी निर्णय को राजनीतिक दबाव में प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा।
‘महिला हूं, दबाव में झुकने वाली नहीं’
सुधा गुप्ता ने कहा कि उनके महिला होने को कमजोरी समझना गलत होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह किसी राजनीतिक दबाव में न डरेंगी और न झुकेंगी। मेयर ने अधिकारियों और कर्मचारियों से भी कानून और नियमों के अनुसार काम करने की अपील की।
उन्होंने कहा कि “किसी के कहने से फाइल नहीं चलेगी, नियम से चलेगी। किसी के दबाव में भुगतान नहीं होगा, दस्तावेज के आधार पर होगा।”
मेयर ने कहा कि मानगो नगर निगम 36 वार्डों की जनता की संस्था है और विकास कार्य राजनीतिक पसंद-नापसंद के आधार पर नहीं, बल्कि जरूरत और नियमों के अनुसार किए जाएंगे। उनका कहना है कि मानगो की जनता को राजनीतिक विवाद नहीं, बल्कि सड़क, पानी, नाली, सफाई और रोशनी जैसी बुनियादी सुविधाओं में सुधार चाहिए।









