सोशल संवाद/जमशेदपुर : रविवार की सुबह गोलमुरी सह जुगसलाई प्रखंड कार्यालय का परिसर आज केवल ईंट-पत्थर का प्रशासनिक भवन नहीं, बल्कि लोकतंत्र की एक विशाल यज्ञशाला में तब्दील हो चुका है।
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मानगो नगर निगम, जुगसलाई नगर परिषद और चाकुलिया नगर पंचायत में कल होने वाले महाकुंभ (मतदान) के लिए आज तैयारियों का अंतिम अध्याय लिखा जा रहा है। फिजाओं में एक अजीब सी जल्दबाजी है, जिसे यहां की गहमा-गहमी और पसीने से लथपथ चेहरों पर साफ पढ़ा जा सकता है।
सजग सेनापति और अभेद्य तैयारी
जिला निर्वाचन पदाधिकारी (नगरपालिका) कर्ण सत्यार्थी आज सुबह ही एक सजग सेनापति की भांति डिस्पैच सेंटर के मोर्चे पर डटे नजर आए। मतपेटिकाओं (बैलेट बाक्स) और मतदान सामग्री का निरीक्षण करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि त्रुटि की गुंजाइश शून्य होनी चाहिए।
उन्होंने पोलिंग पार्टियों से संवाद करते हुए कहा, आप केवल कर्मचारी नहीं, बल्कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के ध्वजवाहक हैं। उनके निर्देशों में आयोग के नियमों का अक्षरशः पालन करने की सख्ती और कर्मियों का मनोबल बढ़ाने वाली नरमी, दोनों का अद्भुत संगम दिखा।

टाटा मोटर्स के पहिए और सुबह का इंतजार
इस व्यवस्था के पीछे की मानवीय कहानी कुछ और ही बयां कर रही है। टाटा मोटर्स के विशाल वाहनों का काफिला बीती रात ही इन लोकतंत्र के प्रहरियों (मतदान कर्मियों) को लेकर प्रखंड कार्यालय पहुंच गया था। सुबह सात बजे जब शहर अंगड़ाई ले रहा था, तब ये कर्मी अपनी-अपनी तालिकाओं पर कतारबद्ध हो चुके थे।
जमशेदपुर प्रखंड कार्यालय परिसर में सुबह से डटे कई मतदान कर्मियों के चेहरों पर इंतज़ार की थकान तैरने लगी है। दबी जुबान में शिकायतें भी हैं—जनाब, सुबह 7 बजे से यहां हैं, सामग्री मिल गई मगर अभी तक एक भी बस का डिस्पैच नहीं हुआ।
प्रशासन और ट्रांसपोर्ट सेल के बीच तालमेल बैठाने की जद्दोजहद जारी है। वाहनों का शोर और लाउडस्पीकर पर पुकारे जाते नाम एक कोलाहल पैदा कर रहे हैं।
सोमवार का सूरज और आज की रात
बहरहाल, देरी और थकान के बावजूद हौसले पस्त नहीं हैं। गुलाबी और सफेद मतपत्रों को अपने सीने से लगाए पोलिंग पार्टियां अब धीरे-धीरे मानगो और जुगसलाई के सुदूर बूथों की ओर कूच करने की तैयारी में हैं। जैसे-जैसे बसें गेट से बाहर निकल रही हैं, वैसे-वैसे यह सुनिश्चित होता जा रहा है कि कल जब शहर जागेगा, तो उसकी तकदीर इन्हीं मतपेटियों में कैद होने के लिए तैयार मिलेगी।










