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असम विधानसभा चुनाव में उतरने की तैयारी में जेएमएम, कांग्रेस-बीजेपी की अलग-अलग प्रतिक्रिया

By Muskan Thakur

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सोशल संवाद/डेस्क : पूर्वोत्तर भारत की राजनीति में इस साल होने वाले असम विधानसभा चुनाव को लेकर नई हलचल देखने को मिल रही है। झारखंड की सत्तारूढ़ पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) ने असम में चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। इस फैसले पर कांग्रेस और बीजेपी दोनों ने अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दी है। जेएमएम का कहना है कि पार्टी इस बार असम की राजनीति में मजबूती से अपनी मौजूदगी दर्ज कराएगी और खासकर आदिवासी समुदाय के बीच अपनी पकड़ को चुनावी ताकत में बदलेगी।

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जेएमएम के केंद्रीय प्रवक्ता मनोज पांडेय ने पार्टी स्थापना दिवस कार्यक्रम के बाद साफ किया कि असम विधानसभा चुनाव लड़ने का फैसला पूरी गंभीरता से लिया गया है। उनका दावा है कि असम में आदिवासी समाज और टी-ट्राइब समुदाय के बीच पार्टी के समर्थकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि पार्टी नेतृत्व का मानना है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की राजनीतिक छवि और संगठन की ताकत के दम पर असम की राजनीति में नया समीकरण बनाया जा सकता है। हालांकि, पार्टी ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि वह कितनी सीटों पर उम्मीदवार उतारेगी।

जेएमएम नेताओं का कहना है कि पार्टी किसी भी गठबंधन के लिए तैयार है, लेकिन इसके लिए कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को पहल करनी होगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि असम में कौन किसके खिलाफ चुनाव लड़ रहा है, इससे पार्टी को ज्यादा फर्क नहीं पड़ता। उनका लक्ष्य संगठन का विस्तार और क्षेत्रीय राजनीति में नई पहचान बनाना है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि असम की 126 विधानसभा सीटों में से 19 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं और जेएमएम की नजर खासतौर पर इन सीटों पर है।

इस घोषणा पर कांग्रेस की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई है। प्रदेश कांग्रेस महासचिव राकेश सिन्हा ने कहा कि असम में कांग्रेस की लड़ाई जेएमएम से नहीं है और अगर जेएमएम चुनाव लड़ना चाहती है तो इस पर अंतिम फैसला पार्टी का शीर्ष नेतृत्व करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि इससे बीजेपी को खुश होने की जरूरत नहीं है, क्योंकि कांग्रेस का दावा है कि आगामी चुनाव में सत्ता परिवर्तन संभव है।

वहीं बीजेपी ने जेएमएम के फैसले पर निशाना साधा है। झारखंड बीजेपी के मीडिया प्रभारी शिवपूजन पाठक ने कहा कि हर राजनीतिक दल को चुनाव लड़ने और अपने संगठन का विस्तार करने का अधिकार है, लेकिन जेएमएम को असम जाने से पहले अपने पिछले चुनावी प्रदर्शन की समीक्षा करनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि झारखंड में सरकार की नाकामी से ध्यान भटकाने के लिए यह राजनीतिक रणनीति अपनाई जा रही है।

असम विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर राजनीतिक माहौल पहले से ही गरमाया हुआ है। ऐसे में जेएमएम का चुनावी मैदान में उतरना राज्य की राजनीति में नए समीकरण पैदा कर सकता है। आदिवासी वोट बैंक को साधने की कोशिश और संभावित गठबंधन की चर्चाओं के बीच आने वाले दिनों में चुनावी रणनीति और स्पष्ट हो सकती है।

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