सोशल संवाद / रांची : झारखंड हाईकोर्ट ने सरायकेला-खरसावां जिले के राजनगर स्थित चालियामा स्टील प्लांट (सीएसपी) से जुड़े जनहित मामले में अहम निर्देश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि उद्योगों के व्यावसायिक हितों के कारण आम जनता को असुविधा नहीं झेलनी चाहिए। अदालत ने सड़कों पर भारी वाहनों की अवैध पार्किंग रोकने, आंतरिक पार्किंग व्यवस्था सुनिश्चित करने और दुर्घटना प्रभावित क्षेत्र में ट्रॉमा सेंटर सहित समुचित स्वास्थ्य सुविधाएं विकसित करने का आदेश दिया है।

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चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने नागेश्वर आचार्य व अन्य की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए गुरुवार को यह आदेश पारित किया। याचिका में आरोप लगाया गया था कि चालियामा स्टील प्लांट में पर्याप्त पार्किंग व्यवस्था नहीं होने के कारण ट्रक सड़कों पर खड़े रहते हैं, जिससे यातायात बाधित होती है और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। अदालत ने माना कि सार्वजनिक सड़कों का असंतुलित और अत्यधिक उपयोग आम लोगों के अधिकारों का उल्लंघन है।
कोर्ट ने कहा कि उद्योगों को अपने व्यावसायिक कार्यों के लिए सार्वजनिक संसाधनों के अनुचित उपयोग की अनुमति नहीं दी जा सकती।
चिकित्सा सुविधा पर तीन माह में निर्णय लिया जाए:
कोर्ट ने झारखंड बिल्डिंग बायलॉज का सख्ती से पालन कराने का निर्देश देते हुए कहा कि प्लांट परिसर में पर्याप्त पार्किंग सुनिश्चित की जाए, ताकि सड़कों पर भारी वाहनों की अवैध पार्किंग न हो। अदालत ने श्रमिकों और सड़क दुर्घटना पीड़ितों के लिए पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी पर भी चिंता जताई। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि प्रभावित क्षेत्र में ट्रॉमा सेंटर और आपात चिकित्सा सुविधाएं विकसित करने पर तीन माह में नीति निर्णय लिया जाए और स 18 माह के भीतर उसे लागू किया जाए। उ साथ ही, कंपनी को सीएसआर के तहत इसमें सहयोग करने की संभावना भी तलाशने को कहा गया है। कोर्ट ने उद्योग विभाग के प्रधान सचिव को निर्देश दिया कि छह माह के भीतर सभी निर्देशों के अनुपालन की विस्तृत रिपोर्ट अदालत में दाखिल करें।









