सोशल संवाद / नई दिल्ली : कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने केरलम में विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम एपस्टीन की फाइलों में है और इसी कारण उन्होंने खुद को बचाने के लिए दबाव में अमेरिका के साथ व्यापार समझौता किया है। उन्होंने प्रधानमंत्री को कायर बताते हुए कहा कि उनमें भारत के लिए खड़े होने की हिम्मत नहीं है।
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केरलम के पुथेनथोप, कोल्लम और कोवडियार में जनसभाओं में उमड़ी विशाल भीड़ के बीच वायनाड से सांसद प्रियंका गांधी ने मध्य पूर्व के संकट का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां फंसे केरलम के लोगों की सुरक्षा के लिए मोदी सरकार के पास कोई ठोस नीति नहीं है। उन्होंने कटाक्ष किया कि नरेंद्र मोदी ने इस मुश्किल समय में देश के लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की बजाय अमेरिका और इजराइल के सामने झुकना चुना है, जिसकी कीमत भारत के लोग चुका रहे हैं। उन्होंने कहा कि तेल और एलपीजी की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं।
उन्होंने कहा कि व्यापार समझौते के तहत अरबों रुपये का अमेरिकी सामान भारत को खरीदना पड़ेगा। अमेरिका के लिए कृषि बाजार खोल देने से भारतीय किसानों को बड़ा नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा अमेरिका को सौंपकर देश का भविष्य दांव पर लगा दिया है। अब अमेरिका बताता है कि भारत को किससे और कब तेल खरीदना है। प्रधानमंत्री के फैसले केवल अडानी व अंबानी जैसे उद्योगपति मित्रों को फायदा पहुंचाने के लिए होते हैं।
यूडीएफ़ प्रत्याशियों के पक्ष में अपने संबोधन में प्रियंका गांधी ने एलडीएफ सरकार और मुख्यमंत्री विजयन को भाजपा की ‘बी-टीम’ बताया। उन्होंने कहा कि चाहे एलडीएफ हो या भाजपा, दोनों ही भ्रष्ट और कॉर्पोरेट परस्त हैं।
भाजपा और एलडीएफ के बीच गुप्त समझौते की ओर इशारा करते हुए प्रियंका गांधी ने आगे कहा कि विपक्षी नेताओं को केंद्रीय एजेंसियों के माध्यम से निशाना बनाया जाता है, लेकिन क्या कारण है कि उनके द्वारा किसी वामपंथी नेता को निशाना नहीं बनाया गया। उन्होंने याद दिलाया कि सबरीमाला मंदिर में हुई चोरी पर भी प्रधानमंत्री ने चुप्पी साधे रखी।
प्रियंका गांधी ने अपने संबोधन में केरलम की संस्कृति और वहां के लोगों की भी सराहना की। उन्होंने प्रदेश की मौजूदा स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि स्वास्थ्य प्रणाली चरमरा रही है; योग्य नर्सों और डॉक्टरों की कमी नहीं है, लेकिन उन्हें यहां रोजगार और उचित वेतन नहीं मिल रहा है। उन्होंने कहा कि आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को महीनों तक धरना देना पड़ा। उन्होंने कहा कि रबड़, कॉफी, चाय, डेयरी के किसान बढ़ते खर्चों और कम सरकारी सहायता के कारण संकट में हैं।
मछुआरों की उपेक्षा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पर्यटन और बंदरगाहों से होने वाला लाभ बाहरी बड़े उद्योगपतियों को दिया जा रहा है, जबकि स्थानीय मछुआरे सुविधाओं के अभाव में संघर्ष कर रहे हैं। तेल की तेजी से बढ़ती कीमतों से मछुआरे सबसे ज़्यादा प्रभावित हुए हैं। उन्होंने कहा कि बेरोजगारी के कारण युवाओं को पलायन करना पड़ रहा है।
अंत में उन्होंने जनता से यूडीएफ उम्मीदवारों को भारी मतों से जिताने का आह्वान करते हुए गठबंधन की गारंटियां भी गिनाईं।









