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राघव चड्ढा बोले- आवाज दबाने की कोशिश, AAP पर उठाए सवाल, विपक्ष ने भी साधा निशाना

By Aditi Pandey

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questions raised on AAP राघव चड्ढा

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सोशल संवाद/डेस्क: राज्यसभा में उपनेता पद से हटाए जाने के बाद आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता राघव चड्ढा ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने एक वीडियो जारी कर अपनी पीड़ा जाहिर करते हुए कहा कि उनकी आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है। चड्ढा ने भावुक और शायराना अंदाज में कहा कि उनकी खामोशी को उनकी हार न समझा जाए, क्योंकि वक्त आने पर वह अपनी बात मजबूती से रखेंगे।

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राघव चड्ढा ने कहा कि संसद में जब भी उन्हें बोलने का मौका मिला, उन्होंने हमेशा आम जनता से जुड़े मुद्दों को उठाया। उन्होंने सवाल किया कि क्या जनता की समस्याओं को उठाना कोई अपराध है। उनके मुताबिक, पार्टी की ओर से राज्यसभा सचिवालय को यह सूचना दी गई है कि उन्हें संसद में बोलने का अवसर न दिया जाए, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। उन्होंने यह भी कहा कि वह समझ नहीं पा रहे हैं कि आखिर उनके बोलने से पार्टी को क्या नुकसान हो रहा है।

चड्ढा ने अपने बयान में उन मुद्दों का भी जिक्र किया, जिन्हें उन्होंने संसद में उठाया था। उन्होंने महंगे एयरपोर्ट खाने, जोमैटो डिलीवरी कर्मियों की परेशानियों, टोल प्लाजा शुल्क और बैंक चार्ज जैसे मुद्दों को जनता से जुड़ा बताया। उनका कहना है कि इन विषयों को उठाने से आम लोगों को राहत मिल सकती है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें बोलने से रोकने की कोशिश की जा रही है, जो बेहद चिंताजनक है।

उन्होंने अपने समर्थकों से अपील करते हुए कहा कि वे उनका साथ बनाए रखें, क्योंकि वह हमेशा जनता की आवाज उठाते रहेंगे। चड्ढा ने यह भी संकेत दिया कि वह इस मुद्दे पर पीछे हटने वाले नहीं हैं और समय आने पर अपनी बात और मजबूती से रखेंगे।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने आम आदमी पार्टी पर हमला बोला है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि अगर किसी सांसद को बोलने से रोका जाता है तो यह लोकतंत्र के खिलाफ है और यह एक तरह की तानाशाही को दर्शाता है। वहीं कांग्रेस ने भी इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि इस तरह के कदम लोकतांत्रिक परंपराओं को कमजोर करते हैं।

कुल मिलाकर, राघव चड्ढा का यह बयान न केवल आम आदमी पार्टी के भीतर चल रहे मतभेदों को उजागर करता है, बल्कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति में बड़ा विवाद बन सकता है।

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