सोशल संवाद / डेस्क : पिछले दिनों अखबारों के माध्यम से पता चला कि बिस्टूपुर में चाय दुकान चलाने वाली एक युवती पर कुछ मनचलों ने चाय मागने के विवाद पर उस युवती पर चाय फेंक दिया था जिससे वह बुरी तरह जल गयी और उसे इलाज के लिये T.M.H. में भर्ती होना पड़ा। चूंकि युवती गरीब थी।
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अतः कुछ लोग उसकी मदद करने के लिए आगे आये पर T.M.H. में महंगे ईलाज की वजह से भारी-भरकम बिल आ गया। ऐसे में शहर की जानी-मानी दो हस्तियों ने जो अलग-अलग राजनैतिक दलों से थे, ने दावा किया कि उन्होने ही बिल माफ करवाया है। दो जानी-मानी हस्तियों के बीच श्रेय लेने की यह स्पर्धा अखबारो की सुर्खिया बनी
यहा मैं यह याद दिलाना चाहता हूं कि उक्त बिल माफी C.S.R. के तहत टाटा स्टील करती है। संपूर्ण शुद्ध मुनाफे का दो प्रतिशत C.S.R. के तहत होता है। यह टाटा स्टील द्वारा दान के तहत नहीं बल्कि कानून के तहत दिया जाता है। पर राजनैतिक व प्रभावशाली लोग श्रेय लेने के लिए कहते है कि उन्होनें माफ करवा दिया है। टोटल शुद्ध मुनाफे का दो प्रतिशत कम्पनी को कानूनन खर्च करना ही होता है। यहां यह उल्लेखनीय है कि Chat GPT से प्राप्त जानकारी के अनुसार वित्तीय वर्ष 2024-25 में टाटा स्टील ने रु 3,100 करोड़ का शुद्ध लाभ कमाया जिसके अनुसार कम्पनी ने मुनाफे का दो प्रतिशत C.S.R. के तहत खर्च किया होगा ऐसी संभावना है।
अब अगर एक लाख रुपया भी प्रतिदिन कंपनी ने बिलमाफ किया होता तो एक महीने में 30 लाख रुपया व सालभर में 360 लाख रुपया गरीब लोगों का माफ किया जा सकता था, जो नहीं किया गया। टेल्को अस्पताल तथा टिनप्लेट अस्पताल को भी अपनी कंपनी केशुद्ध मुनाफे का 2 प्रतिशत C.S.R. के तहत खर्च करना है, पर शायद ही उन्होने किसी जरुरतमंद का बिल माफ किया हो ? हमारे माननीय जनप्रतिनिधियों को इसकी जाच पड़ताल करनी चाहिए।
यहां मैं एक महत्वपूर्ण जानकारी T.M.H. के सर जहांगीर गांधी ब्लॉक (चार तल्ला अस्पताल) के विषय में बताना चाहता हूं। इस अस्पताल की बिल्डिंग अनक्लेमड मनी (Unclaimed Money) जो जनता का पैसा माना जाना चाहिए से बना था।
एक और महत्वपूर्ण बात कि M.T M.H. कैंसर अस्पताल में जो CT SCAN मशीन लगी है उसे जर्मनी की सीमेन्स नामक कंपनी ने M.T M.H. को दान में दी थी इस शर्त के साथ की M.T M.H. अस्पताल में 50 प्रतिशत गरीबों व कमजोर वर्ग के लोगों का मुफ्त में ईलाज होगा। CT SCAN मशीन के उद्घटन समारोह में पर्चा के माध्यम से दी गई थी। पर सब जानते है कि T M.H. तथा M.T.M.H. में गरीबों को कोई लाभ नहीं मिलता यहा तक कि T.M.H. में आयुष्मान कार्ड को भी कंपनी नहीं मानती।
माननीय जनप्रतिनिधियों से निवेदन है कि इन सब मुद्दों पर जनता को राहत दिलाने के लिए आपस में स्पर्धा करे। आशा है वे ऐसा करेंगे। यहां यह विशेष रुप से उल्लेखनीय है कि टाटा स्टील, टेल्को, टिनप्लेट व अन्य कंपनियां जमशेदपुर के जल, जंगल, जमीन पर बसी है जो उन्हें नाम मात्र के शुल्क पर दिया गया है। सारे खनिज पदार्थ भी अत्यन्त सस्ते दर उन्हें सुलभ कराया गया था व है।
लीज समझौते में भी सब नागरिकों को समान नागरिक सुविधा देने की बात कही गई है। माननीय जन प्रतिनिधियों को इस पर भी गौर करना चाहिए।
कोरोना काल में अनेकों लोग वेंटिलेटर तथा बेड के अभाव में जान से हाथ धो बैठे थे। कंपनी ने कुछ नहीं किया, जबकि बम्बई जैसे शहर में जहां कंपनी का हेड ऑफिस है जनता को ढेर सारी सुविधाये दी गई थी।









