सोशल संवाद / डेस्क : राम मंदिर के चढ़ावे की चोरी के मामले में पुलिस की जांच के दौरान कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। करीब 90 दिन बाद दाखिल किए गए आरोपपत्र में दावा किया गया है कि कथित चोरी की साजिश रचने के लिए आरोपितों ने आमने-सामने बातचीत के बजाय टेक्स्ट मैसेज का सहारा लिया था।
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पुलिस ने इन टेक्स्ट मैसेज को भी आरोपपत्र का हिस्सा बनाया है। जांच के दौरान सर्विलांस सेल ने आरोपितों के बीच हुई करीब 3300 टेक्स्ट मैसेज की बातचीत बरामद की है।
फोन कॉल से बचने के लिए टेक्स्ट मैसेज का इस्तेमाल
आरोपपत्र के मुताबिक, मामले के मुख्य साजिशकर्ता बताए गए अनुकल्प मिश्र की अविनाश और लवकुश से टेक्स्ट मैसेज के जरिए बातचीत होती थी। पुलिस का दावा है कि आरोपित फोन पर बातचीत को असुरक्षित मानते थे और इसी वजह से टेक्स्ट मैसेज के जरिए संपर्क में रहते थे।
सर्विलांस सेल को इन संदेशों को रिकवर करने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। जांच में मिले संदेशों को पुलिस ने केस की जांच का अहम हिस्सा बनाया है।
‘पहले खेल, फिर जेल और फिर बेल’ मैसेज का जिक्र
आरोपपत्र में आरोपितों के बीच हुई बातचीत के एक मैसेज का भी उल्लेख किया गया है। बताया गया है कि लवकुश के एक मैसेज के जवाब में अनुकल्प ने लिखा था— “पहले खेल, फिर जेल और फिर होगी बेल।” पुलिस ने इस बातचीत को भी आरोपपत्र में शामिल किया है। यह संदेश कथित तौर पर मामला सामने आने और जांच तेज होने के बाद भेजा गया था।
दानपात्रों की चाबी को लेकर भी दावा
आरोपपत्र में मंदिर ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपतराय के चालक रहे रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू को लेकर भी कई आरोपों का उल्लेख किया गया है।
पुलिस के अनुसार, टिन्नू यादव पर श्रद्धालुओं को दर्शन कराने के नाम पर रुपये लेने और बाद में उन पैसों से आभूषण खरीदने का आरोप है। आरोपपत्र में यह भी दावा किया गया है कि उसके पास बिना किसी औपचारिक आदेश के मंदिर के दानपात्रों की चाबियां रहती थीं।
रिश्तेदार को गणना कक्ष में नौकरी दिलाने का आरोप
जांच में पुलिस ने यह भी आरोप लगाया है कि टिन्नू यादव ने मंदिर से जुड़े अपने संपर्कों और प्रभाव का इस्तेमाल किया। इसी के जरिए उसने अपने भतीजे मनीष को मंदिर में नौकरी दिलाई और उसे गणना कक्ष में तैनात कराया।
आरोपपत्र में दर्ज इन दावों के आधार पर पुलिस ने मामले में डिजिटल साक्ष्यों और आरोपितों की भूमिका को भी जांच का हिस्सा बनाया है। हालांकि, आरोपपत्र में लगाए गए आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत की सुनवाई के बाद ही होगा।












