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राम रहीम को फिर मिली 30 दिन की पैरोल, 2017 के बाद 16वीं बार जेल से बाहर आएंगे डेरा प्रमुख

By Tamishree Mukherjee

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सोशल संवाद / डेस्क : Gurmeet Ram Rahim Singh को एक बार फिर 30 दिनों की पैरोल मिल गई है। मंगलवार को मिली इस अस्थायी रिहाई के बाद वह रोहतक की सुनारिया जेल से बाहर आएंगे। साल 2017 में सजा सुनाए जाने के बाद से यह राम रहीम की 16वीं अस्थायी रिहाई है।

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इससे पहले जनवरी 2026 में शाह सतनाम सिंह की जयंती के अवसर पर उन्हें 40 दिनों की पैरोल दी गई थी। साल 2026 में यह उनकी दूसरी पैरोल है। जेल रिकॉर्ड के अनुसार, राम रहीम बंदी संख्या 8647/C के रूप में दर्ज हैं और अब तक अपनी सजा के दौरान करीब 406 दिन जेल से बाहर बिता चुके हैं।

किन मामलों में सजा काट रहे हैं राम रहीम?

साल 2017 में विशेष CBI अदालत ने दो महिला अनुयायियों से दुष्कर्म मामले में राम रहीम को 20 साल की सजा सुनाई थी। इसके बाद 2019 में पत्रकार Ram Chander Chhatrapati की हत्या मामले में उन्हें उम्रकैद की सजा मिली थी। वहीं 2021 में डेरा प्रबंधक रणजीत सिंह हत्या साजिश मामले में भी दोषी ठहराया गया था।

हालांकि बाद में Punjab and Haryana High Court ने 2024 में रणजीत सिंह हत्या मामले और 2026 में राम चंद्र छत्रपति हत्या मामले में राम रहीम को बरी कर दिया।

2026 की पैरोल सीमा हुई पूरी

हरियाणा गुड कंडक्ट प्रिज़नर्स (टेम्पररी रिलीज़) एक्ट, 2022 के तहत एक कैदी को सालभर में अधिकतम 10 सप्ताह की पैरोल दी जा सकती है। 40 दिन की पिछली पैरोल और अब 30 दिन की नई पैरोल के साथ राम रहीम इस वर्ष की निर्धारित पैरोल सीमा पूरी कर चुके हैं।

हालांकि कानून के अनुसार उन्हें अभी 3 सप्ताह की फरलो मिल सकती है। पैरोल और फरलो में बड़ा अंतर यह है कि फरलो के दौरान बिताया गया समय सजा में शामिल माना जाता है, जबकि पैरोल के दौरान बिताया गया समय सजा अवधि में नहीं जोड़ा जाता।

2017 में भड़की थी हिंसा

राम रहीम को 2017 में दोषी ठहराए जाने के बाद उनके समर्थकों ने पंजाब, हरियाणा समेत कई राज्यों में हिंसक प्रदर्शन किए थे। इस दौरान करीब 31 लोगों की मौत हुई थी और 250 से अधिक लोग घायल हुए थे। कई स्थानों पर आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाएं भी हुई थीं। बाद में हाईकोर्ट ने नुकसान की भरपाई के लिए डेरा सच्चा सौदा की संपत्तियां जब्त करने के आदेश दिए थे।

सिरसा स्थित Dera Sacha Sauda के देशभर में लाखों अनुयायी बताए जाते हैं, खासकर हरियाणा, पंजाब और राजस्थान में इसका बड़ा प्रभाव माना जाता है।

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