सोशल संवाद/डेस्क : रांची में मौसम के अचानक बदलते मिजाज का सीधा असर बच्चों के स्वास्थ्य पर दिखाई दे रहा है। सुबह-शाम की ठंड और दोपहर की गर्मी ने बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर दिया है। इसका परिणाम यह है कि शहर के प्रमुख सरकारी अस्पताल RIMS (राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान) के शिशु रोग ओपीडी में मरीजों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।
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डॉक्टरों के अनुसार प्रतिदिन ओपीडी में आने वाले बच्चों में लगभग आधे बच्चे सर्दी, जुकाम, बुखार और सिरदर्द की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। खासतौर पर 5 से 12 वर्ष आयु वर्ग के बच्चे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।
30% तक बढ़े वायरल इंफेक्शन के मामले
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले एक सप्ताह में मरीजों की संख्या में करीब 30 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है। अधिकतर मामलों में वायरल संक्रमण पाया जा रहा है, जो मौसमी बदलाव से जुड़ा हुआ है।
सुबह ठंडी हवा और दोपहर की तेज धूप के कारण बच्चों के शरीर का तापमान संतुलन बिगड़ रहा है। इससे ऊपरी श्वसन तंत्र संक्रमण (Upper Respiratory Infection) के मामले बढ़ रहे हैं। इसके अलावा डिहाइड्रेशन की समस्या भी सामने आ रही है।
ठंडी चीजों का बढ़ा सेवन बना कारण
डॉक्टरों का मानना है कि मौसम में उतार-चढ़ाव के बीच बच्चे आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक्स और अन्य ठंडी वस्तुओं का अधिक सेवन कर रहे हैं। इससे गला खराब होना, सिरदर्द और बुखार जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं।
फरवरी का महीना अक्सर अर्ध-शुष्क रहता है, जिसमें न्यूनतम और अधिकतम तापमान में काफी अंतर होता है। यह बदलाव छोटे बच्चों के लिए अधिक चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है।
अभिभावकों के लिए जरूरी सलाह
विशेषज्ञों ने अभिभावकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। बच्चों को सुबह और शाम के समय गर्म कपड़े पहनाना जरूरी है, जबकि दोपहर में हल्के कपड़े पहनाए जा सकते हैं। मौसम के अनुसार कपड़ों में बदलाव करना बेहद जरूरी है।
इसके साथ ही बच्चों को पर्याप्त मात्रा में पानी पिलाएं ताकि डिहाइड्रेशन से बचा जा सके। खानपान में गर्म और पौष्टिक भोजन शामिल करें। फल और हरी सब्जियों की मात्रा बढ़ाएं और ठंडी चीजों से दूरी बनाए रखें। यदि बच्चे को हल्का बुखार, लगातार सिरदर्द या सांस से जुड़ी परेशानी हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
Ranchi Health Alert: सतर्कता ही बचाव
रांची में बदलते मौसम को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने भी लोगों से सावधानी बरतने की अपील की है। समय पर इलाज और सही देखभाल से मौसमी बीमारियों को नियंत्रित किया जा सकता है। मौसम के इस संक्रमण काल में विशेष रूप से बच्चों की देखभाल करना जरूरी है, क्योंकि उनका शरीर तापमान के उतार-चढ़ाव को सहन करने में वयस्कों की तुलना में कम सक्षम होता है।










