सोशल संवाद / जमशेदपुर : ग्रामीण इलाकों में रहने वाले मरीजों के लिए राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं का बड़ा विस्तार करने जा रही है। अब गठिया, सर्वाइकल, कमर दर्द और किडनी की गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को महंगे निजी अस्पतालों की शरण नहीं लेनी होगी। स्वास्थ्य विभाग ने जून माह तक राज्य के 330 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) और 194 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) में अत्याधुनिक फिजियोथेरेपी सेंटर खोलने का निर्णय लिया है।

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यह सुविधा पूरी तरह निःशुल्क रहेगी। इस योजना के तहत पूर्वी सिंहभूम जिले के 9 पीएचसी और 9 सीएचसी में यह सुविधा शुरू होगी। साथ ही, जिलास्तर तक सीमित मुफ्त डायलिसिस की सुविधा का विस्तार करते हुए इसे पूर्वी सिंहभूम के 6 केंद्रों सहित राज्य के 77 सीएचसी में भी बहाल किया जाएगा।
बदलती जीवनशैली और सड़क दुर्घटनाओं के बढ़ते ग्राफ को देखते हुए फिजियोथेरेपी की मांग में भारी उछाल आया है। आंकड़ों के अनुसार, राज्य में प्रतिवर्ष लगभग 50 हजार लोग सड़क हादसों का शिकार होते हैं, जिन्हें दीर्घकालिक फिजियोथेरेपी की आवश्यकता होती है। इसे देखते हुए सरकार पीपीपी मोड पर निजी एजेंसियों के सहयोग से अत्याधुनिक उपकरण और प्रशिक्षित मैनपावर तैनात करेगी। अगले माह से इसके लिए आवेदन आमंत्रित किए जाएंगे।
77 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर डायलिसिस होगी
वर्तमान में डायलिसिस की सुविधा केवल सदर अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों (जैसे एमजीएम) तक सीमित है। नई योजना के तहत चयनित 77 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर यह सेवा पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध होगी। सरकार इसका पूरा वित्तीय भार खुद वहन करेगी, जिससे निम्न और मध्यम वर्ग के किडनी मरीजों को बड़ी आर्थिक राहत मिलेगी।
डॉ. इरफान अंसारी, स्वास्थ्य मंत्री बोले- हमारा उद्देश्य सरकारी अस्पतालों में मरीजों को वही सभी सुविधाएं देना है जो निजी अस्पतालों में भारी भरकम शुल्क पर मिलती हैं। जून तक इन सेवाओं को बहाल करने का लक्ष्य है ताकि गरीब से गरीब व्यक्ति को भी समय पर इलाज मिल सके। पीएचसी, सीएचसी तक में फिजियोथेरेपी व डायलिसिस की सुविधा होने से मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी।









