सोशल संवाद / डेस्क : देश में नौकरी करने वाले करोड़ों कर्मचारियों के लिए सैलरी से जुड़ा बड़ा अपडेट सामने आया है। नए लेबर कोड (Code on Wages, 2019) के तहत कंपनियों को कर्मचारियों की मासिक सैलरी अगले महीने की 7 तारीख तक भुगतान करनी होगी। अगर कंपनी तय समय पर वेतन नहीं देती है, तो कर्मचारी संबंधित अधिकारियों के पास शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

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क्या 7 तारीख के बाद सैलरी देना गलत होगा?
नए नियमों के अनुसार, मासिक वेतन पाने वाले कर्मचारियों को अगले महीने की 7 तारीख खत्म होने से पहले सैलरी का भुगतान किया जाना चाहिए। यानी अगर किसी कर्मचारी की सैलरी हर महीने मिलती है तो कंपनी को तय समय सीमा के अंदर भुगतान करना होगा।
हालांकि, सोशल मीडिया पर चल रही कुछ खबरों में दावा किया जा रहा है कि सैलरी लेट होने पर मैनेजर को सीधे जेल भेजा जा सकता है। असल में कानून में देरी या नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई का प्रावधान है, लेकिन हर मामले में सीधे जेल की कार्रवाई नहीं होती। यह संबंधित कानून, उल्लंघन की प्रकृति और अधिकारियों की प्रक्रिया पर निर्भर करता है।
अलग-अलग कर्मचारियों के लिए अलग समय सीमा
लेबर कोड में वेतन भुगतान के लिए अलग-अलग समय सीमा तय की गई है:
- दैनिक वेतन पाने वालों को काम खत्म होने के बाद भुगतान किया जाना चाहिए।
- साप्ताहिक वेतन वालों को सप्ताह खत्म होने से पहले भुगतान करना होगा।
- पखवाड़े (Fortnight) के आधार पर वेतन पाने वालों को अवधि खत्म होने के दो दिन के अंदर भुगतान करना होगा।
- मासिक वेतन पाने वालों को अगले महीने की 7 तारीख तक सैलरी मिलनी चाहिए।
नौकरी छोड़ने पर भी बदला नियम
अगर कोई कर्मचारी नौकरी छोड़ता है, उसे हटाया जाता है या उसकी सेवा समाप्त होती है, तो कंपनी को उसका बकाया वेतन और अंतिम भुगतान तय समय के अंदर करना होगा। नए नियमों में फुल एंड फाइनल सेटलमेंट के लिए भी समय सीमा तय की गई है।
कर्मचारियों को क्या करना चाहिए?
अगर किसी कंपनी में लगातार सैलरी में देरी हो रही है तो कर्मचारी:
- कंपनी के HR या प्रबंधन को लिखित शिकायत दे सकते हैं।
- अपनी सैलरी स्लिप, बैंक स्टेटमेंट और अन्य रिकॉर्ड सुरक्षित रखें।
- जरूरत पड़ने पर श्रम विभाग या संबंधित अधिकारी से शिकायत कर सकते हैं।
कंपनियों को करना होगा वेतन नियमों का पालन
नए वेतन नियमों का उद्देश्य कर्मचारियों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करना और वेतन से जुड़े विवादों को कम करना है। इससे संगठित और असंगठित दोनों क्षेत्रों के कर्मचारियों को बेहतर सुरक्षा मिलने की उम्मीद है।









