सोशल संवाद /जमशेदपुर: दवाओं की गुणवत्ता को लेकर सामने आई रिपोर्ट के बाद जमशेदपुर समेत पूरे कोल्हान में औषधि विभाग सतर्क हो गया है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) की सितंबर 2026 की रिपोर्ट में देशभर के 330 दवा सैंपल निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे। इसके बाद स्थानीय बाजार में संबंधित दवाओं के बैच की उपलब्धता और स्टॉक का पता लगाने के लिए जांच शुरू की गई है।
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केंद्रीय और राज्य प्रयोगशालाओं में फेल हुए 330 सैंपल
CDSCO की रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर 2026 में गुणवत्ता जांच के दौरान 330 दवा सैंपल को निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाया गया। इनमें केंद्रीय औषधि प्रयोगशालाओं में जांचे गए 42 सैंपल और राज्य औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं में जांचे गए 288 सैंपल शामिल हैं।
किसी दवा के सैंपल को ‘नॉट ऑफ स्टैंडर्ड क्वालिटी’ (NSQ) घोषित करने का मतलब है कि वह एक या अधिक निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं उतरा। हालांकि, यह निष्कर्ष संबंधित जांचे गए उत्पाद और उसके बैच पर लागू होता है। इसका अर्थ यह नहीं है कि उसी ब्रांड की सभी दवाएं खराब हैं।
जमशेदपुर और कोल्हान में दवाओं के स्टॉक की जांच
गुणवत्ता अलर्ट के बाद औषधि विभाग जमशेदपुर सहित कोल्हान के बाजारों में संबंधित बैच की दवाओं की उपलब्धता का पता लगा रहा है। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, दवा कारोबारियों से खरीद-बिक्री, खपत और बचे हुए स्टॉक का विवरण मांगा गया है।
इस जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि गुणवत्ता परीक्षण में विफल घोषित दवाओं के संबंधित बैच स्थानीय बाजार में पहुंचे हैं या नहीं। यदि ऐसे बैच मेडिकल दुकानों या अन्य भंडारण स्थलों पर मिलते हैं, तो उन्हें चिह्नित कर नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
पैरासिटामोल, एंटीबायोटिक और अन्य दवाओं पर नजर
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, जांच में पैरासिटामोल, एंटीबायोटिक और बीपी, थायराइड व मधुमेह के उपचार में इस्तेमाल होने वाली कुछ दवाओं के संबंधित बैचों की पड़ताल की जा रही है। कुछ इंजेक्शन और अन्य औषधीय उत्पादों की उपलब्धता की भी जांच की जानकारी सामने आई है।
यहां ध्यान देने वाली बात है कि किसी दवा के एक बैच का सैंपल गुणवत्ता जांच में फेल होने से उस दवा के सभी बैचों को खराब नहीं माना जा सकता। इसलिए उत्पाद के नाम के साथ निर्माता और बैच नंबर का मिलान करना जरूरी है।
कॉस्मेटिक उत्पादों की गुणवत्ता पर भी सवाल
स्थानीय रिपोर्टों में कुछ कॉस्मेटिक उत्पादों में निर्धारित सीमा से अधिक पारा (मर्करी) पाए जाने और कुछ फेयरनेस क्रीम में हाइड्रोक्विनोन मिलने का भी उल्लेख है। इनमें चार फेयरनेस क्रीम और एक बॉडी लोशन की बात कही गई है। इन उत्पादों की पहचान और बाजार में उपलब्धता को लेकर भी सतर्कता बरती जा रही है।
दवा खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान
दवा की गुणवत्ता को लेकर किसी भी तरह की आशंका होने पर मरीज और उनके परिजन कुछ जरूरी सावधानियां बरत सकते हैं:
- दवा की स्ट्रिप या पैकेट पर लिखा नाम, निर्माता और बैच नंबर देखें।
- संबंधित दवा का बैच आधिकारिक गुणवत्ता अलर्ट से मिलाएं।
- दवा को लेकर संदेह होने पर डॉक्टर या फार्मासिस्ट से सलाह लें।
- केवल खबर पढ़कर नियमित रूप से ली जा रही दवा अचानक बंद न करें। यदि बैच अलर्ट से मेल खाता है, तो चिकित्सक से सुरक्षित विकल्प के बारे में पूछें।
दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए नियामक संस्थाएं नियमित रूप से सैंपल की जांच करती हैं। जमशेदपुर और कोल्हान में चल रही पड़ताल के बाद यह स्पष्ट होगा कि अलर्ट में शामिल संबंधित बैचों में से कितने स्थानीय बाजार में उपलब्ध हैं और उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की जरूरत है।










