सोशल संवाद/डेस्क : मकर संक्रांति के पावन अवसर पर बुधवार और गुरुवार को पश्चिम बंगाल के गंगासागर तट पर आस्था का विशाल जनसैलाब उमड़ पड़ा। गंगासागर स्नान 2026 में देश-दुनिया से आए लाखों श्रद्धालुओं ने गंगा-सागर के संगम में पवित्र डुबकी लगाकर पुण्य अर्जित किया।
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माना जाता है कि जिस शुभ समय पर माता गंगा ने कपिल मुनि के आश्रम पर उतरकर राजा सगर के 60 हज़ार पुत्रों को मोक्ष दिया था, उसी घड़ी में आज भी गंगासागर स्नान की परंपरा निभाई जाती है। यही वजह है कि हर वर्ष मकर संक्रांति 2026 का यह संगम भारतीय संस्कृति का सबसे पवित्र और आस्था से भरा आयोजन माना जाता है।
15 लाख से अधिक लोगों ने किया स्नान
हालांकि राज्य सरकार ने अभी तक आधिकारिक संख्या जारी नहीं की है,लेकिन प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि अब तक 15 लाख से अधिक श्रद्धालु पुण्य स्नान कर चुके हैं। गुरुवार दोपहर तक यह संख्या 30 लाख के पार जा सकती है। गंगासागर मेले में अब तक पहुंच चुके श्रद्धालुओं का ढोल-नगाड़ों, भक्ति गीतों और जयकारों के साथ स्वागत किया गया। उत्तर भारत, राजस्थान, बिहार, झारखंड, बंगाल ही नहीं, नेपाल और बांग्लादेश से भी बड़े समूहों में श्रद्धालु गंगा सागर पहुंचे हैं।
सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के साथ शुरू हुआ पुण्य मुहूर्त
कपिल मुनि आश्रम के महंत ज्ञान दास के अनुसार
बुधवार रात 9:19 बजे सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करते ही
पुण्य काल शुरू हुआ, जो गुरुवार दोपहर 1:20 बजे तक जारी रहेगा।
यही वजह है कि अधिकतर भक्तों के लिए गुरुवार का स्नान अत्यंत शुभ माना गया।
कई श्रद्धालु तो मंगलवार रात से ही तट पर डेरा जमाए बैठे थे ताकि सबसे पहले पवित्र जल में डुबकी लगा सकें।
सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम, नौसेना और कोस्ट गार्ड भी अलर्ट
गंगासागर में सुरक्षा व्यवस्था अभूतपूर्व रही।
राज्य सरकार के निर्देश पर:
- पुलिस
- सिविल डिफेंस
- होमगार्ड
- राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन टीम
- भारतीय नौसेना
- तटरक्षक बल
मिलाकर लगभग 10,000 से अधिक सुरक्षा कर्मी तैनात किए गए।
समुद्र तट पर विशेष निगरानी, हेल्प डेस्क, खोया-पाया काउंटर और मेडिकल कैंप भी लगाए गए।
इस बार गंगासागर मेले में ड्रोन मॉनिटरिंग और लाइव ट्रैकिंग सिस्टम भी लगाया गया।
कपिल मुनि मंदिर में उमड़ी भक्तों की भीड़
स्नान के बाद श्रद्धालु कपिल मुनि मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना कर रहे हैं। मंदिर परिसर में घंटों की लाइनें, नारियल, प्रसाद और आरती की ध्वनि माहौल को पूरी तरह भक्तिमय बना रही है। कई भक्त परिवारों के साथ आए हैं, तो कुछ साधु-संत पैदल या दंडी मार्च करते हुए संगम तट तक पहुंचे हैं।
गंगासागर- कुंभ के बाद दूसरा सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन
धार्मिक विशेषज्ञों के मुताबिक गंगासागर मेला हिंदू धर्म में कुंभ के बाद दूसरा सबसे बड़ा तीर्थ मेला माना जाता है।
यहां की मान्यता है “कुम्भे स्नान, गंगासागर दर्शन” यानी कुंभ में स्नान और गंगासागर में दर्शन महत्व रखते हैं।
आस्था के साथ पर्यटन में भी बढ़ी रौनक
गंगासागर स्नान 2026 से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बड़ा लाभ पहुंचा है। नौकाओं, होटलों, ठहराव स्थानों, दुकानों, भोजनालयों और परिवहन पर भीड़ देखने को मिल रही है। कई स्थानीय परिवारों ने कहा










