सोशल संवाद/डेस्क : Saraikela के सदर अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति एक बार फिर चिंता का विषय बन गई है। लगभग चार साल पहले 38 लाख रुपये की लागत से तैयार किया गया 6 बेड का अत्याधुनिक आईसीयू अब तक पूरी तरह चालू नहीं हो पाया है। गंभीर मरीजों के इलाज के लिए बनाई गई यह सुविधा आज सिर्फ नाम मात्र की रह गई है और अस्पताल परिसर में एक “शोपीस” बनकर धूल खा रही है।
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इस आईसीयू का निर्माण स्थानीय स्तर पर बेहतर और मुफ्त इलाज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया गया था। इस परियोजना में GAIL India का भी सहयोग मिला था। उम्मीद थी कि इससे आसपास के लोगों को बड़े शहरों में जाने की जरूरत कम होगी, लेकिन संसाधनों की कमी के चलते यह योजना धरातल पर पूरी तरह लागू नहीं हो सकी।
अस्पताल प्रशासन के अनुसार, इस आईसीयू के शुरू न होने की सबसे बड़ी वजह प्रशिक्षित डॉक्टरों और विशेषज्ञ स्टाफ की कमी है। किसी भी आईसीयू के संचालन के लिए फिजिशियन और एमडी स्तर के डॉक्टरों की जरूरत होती है, जो फिलहाल यहां उपलब्ध नहीं हैं। इसके अलावा प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ की भी कमी बताई जा रही है।
इसका सीधा असर मरीजों पर पड़ रहा है। गंभीर स्थिति में आने वाले मरीजों को बेहतर इलाज के लिए अन्य शहरों में रेफर किया जा रहा है। ऐसे में अधिकतर लोगों को निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है, जहां इलाज का खर्च प्रतिदिन 5 हजार से 15 हजार रुपये तक पहुंच जाता है। गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए यह खर्च काफी भारी साबित हो रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर यह आईसीयू शुरू हो जाए, तो कई जिंदगियां बचाई जा सकती हैं। समय पर इलाज मिलने से मरीजों को राहत मिलेगी और उन्हें महंगे निजी अस्पतालों में जाने की मजबूरी से भी छुटकारा मिलेगा।
इस संबंध में सिविल सर्जन डॉ. सरयू प्रसाद सिंह ने बताया कि आईसीयू जैसी सुविधा जिला अस्पताल के लिए बेहद आवश्यक होती है। उन्होंने कहा कि इसे शुरू करने के लिए विभागीय स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं और जल्द ही इसे Rajendra Institute of Medical Sciences से जोड़ा जाएगा। इससे विशेषज्ञ डॉक्टरों के मार्गदर्शन में इसका संचालन संभव हो सकेगा।
वहीं, नगर पंचायत अध्यक्ष मनोज चौधरी ने भी भरोसा दिलाया है कि राज्य सरकार इस दिशा में गंभीर है और जल्द ही इस आईसीयू को चालू किया जाएगा। स्थानीय निवासी अनिल कुमार मिश्रा समेत कई लोगों ने भी प्रशासन से मांग की है कि मरीजों की सुविधा को देखते हुए इस सुविधा को जल्द से जल्द शुरू किया जाए।
कुल मिलाकर, सरायकेला सदर अस्पताल का यह आईसीयू स्वास्थ्य व्यवस्था की एक बड़ी खामी को उजागर करता है जहां सुविधाएं तो बनाई जाती हैं, लेकिन उनके संचालन के लिए जरूरी संसाधनों और योजनाओं की कमी रह जाती है। अब सबकी नजर इस पर है कि प्रशासन के दावे कब तक हकीकत में बदलते हैं।









