सोशल संवाद / डेस्क :सोना देवी विश्वविद्यालय, घाटशिला के एसडीयू स्कूल ऑफ फार्मेसी में देश का 80वां स्वतंत्रता दिवस समारोह हर्षोल्लास, गरिमा और देशभक्ति के वातावरण में मनाया गया। समारोह में विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री प्रभाकर सिंह, कुलपति डॉ. ब्रज मोहन पत पिंगुआ, कुलसचिव डॉ. नित नयना, स्कूल ऑफ फार्मेसी के प्राचार्य श्री सुधांशु शांडिल्य, शिक्षकगण, शिक्षकेतर कर्मचारी तथा बी.फार्मा और डी.फार्मा के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
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इस वर्ष समारोह को फार्मेसी और जनस्वास्थ्य से जोड़ते हुए “स्वस्थ राष्ट्र के लिए महिला सशक्तिकरण — सुरक्षित औषधि, बेहतर स्वास्थ्य” विषय पर केंद्रित किया गया। कार्यक्रम में महिला स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण, औषधियों के सुरक्षित एवं तर्कसंगत उपयोग तथा स्वस्थ समाज के निर्माण में फार्मेसी विशेषज्ञों की भूमिका पर विशेष जोर दिया गया।
कुलाधिपति श्री प्रभाकर सिंह ने कहा कि स्वतंत्रता केवल राजनीतिक आजादी तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक को समान अवसर, सम्मान, स्वास्थ्य और आत्मनिर्भरता प्रदान करना भी इसका महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को शिक्षा, स्वास्थ्य और निर्णय लेने के अवसर देकर सशक्त बनाना मजबूत और विकसित राष्ट्र के निर्माण के लिए जरूरी है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग राष्ट्र निर्माण एवं समाज कल्याण में करने का आह्वान किया।
कुलपति डॉ. ब्रज मोहन पत पिंगुआ ने कहा कि विश्वविद्यालय केवल शिक्षा देने के केंद्र नहीं हैं, बल्कि जिम्मेदार नागरिक और संवेदनशील समाज के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि फार्मेसी के विद्यार्थियों पर समाज के स्वास्थ्य की रक्षा की बड़ी जिम्मेदारी है। सुरक्षित औषधि उपयोग, रोगी देखभाल और जनस्वास्थ्य के प्रति जिम्मेदारी को विद्यार्थियों को अपनी प्राथमिकता बनाना चाहिए।
कुलसचिव डॉ. नित नयना ने महिला सशक्तिकरण और बेहतर स्वास्थ्य के बीच गहरे संबंध को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि सुरक्षित एवं तर्कसंगत औषधि उपयोग, स्वास्थ्य जागरूकता और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच एक स्वस्थ और सशक्त भारत की नींव है।
स्कूल ऑफ फार्मेसी के प्राचार्य श्री सुधांशु शांडिल्य ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस प्रत्येक भारतीय के लिए गौरव, कर्तव्य और संकल्प का पर्व है। उन्होंने कहा कि आज फार्मेसी का क्षेत्र केवल औषधि निर्माण और वितरण तक सीमित नहीं है। रोगों की रोकथाम, औषधि सुरक्षा, रोगी परामर्श, स्वास्थ्य जागरूकता और जनस्वास्थ्य में भी फार्मासिस्ट की महत्वपूर्ण भूमिका है।
सहायक प्राध्यापिका श्रीमती हर्षा वर्मा ने महिला स्वास्थ्य और सशक्तिकरण पर प्रकाश डालते हुए कहा कि स्वस्थ महिला स्वस्थ परिवार और स्वस्थ समाज की आधारशिला होती है। वहीं सहायक प्राध्यापक श्री किशोर कुमार महाकुड़ ने सुरक्षित औषधि उपयोग के महत्व को बताया। उन्होंने कहा कि फार्मासिस्ट का दायित्व केवल दवा उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि मरीज को दवा के सही और सुरक्षित उपयोग की जानकारी देना भी है।
सहायक प्राध्यापिका सुश्री उमा महतो ने विद्यार्थियों को सामाजिक जिम्मेदारी, अनुशासन, मानवीय संवेदनशीलता और राष्ट्रसेवा की भावना के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम को सफल बनाने में प्रयोगशाला प्रदर्शक सुश्री सफीनाज तय्यबा और प्रयोगशाला सहायक श्री प्रतीक का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। बी.फार्मा और डी.फार्मा के विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह और अनुशासन के साथ समारोह में भाग लिया तथा महिला सशक्तिकरण, सुरक्षित औषधि उपयोग, स्वास्थ्य जागरूकता और राष्ट्र निर्माण से जुड़े संदेशों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।
समारोह में यह संदेश प्रमुखता से सामने आया कि सशक्त महिला स्वस्थ परिवार की नींव है, सुरक्षित औषधि बेहतर स्वास्थ्य की आधारशिला है और जिम्मेदार फार्मासिस्ट स्वस्थ राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण सहभागी है। एसडीयू स्कूल ऑफ फार्मेसी ने फार्मेसी शिक्षा को जनस्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, औषधि सुरक्षा और सामाजिक उत्तरदायित्व से जोड़ने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर विश्वविद्यालय ने राष्ट्र की एकता, अखंडता, स्वास्थ्य और समृद्धि के प्रति अपने संकल्प को दोहराया। समारोह का समापन इस संदेश के साथ हुआ कि “स्वस्थ राष्ट्र के लिए महिला सशक्तिकरण — सुरक्षित औषधि, बेहतर स्वास्थ्य” केवल एक विषय नहीं, बल्कि स्वस्थ, सशक्त और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की दिशा में अपनाया जाने वाला संकल्प है।









