सोशल संवाद /डेस्क : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ऑटो निर्यात पर 25 फीसद की टैरिफ लगाने का फैसला किया है। ट्रम्प के इस फैसले के बाद ऑटो कंपोनेंट निर्माताओं को सबसे ज्यादा नुकसान होने की संभावना जताई जा रही है। ट्रम्प के 25 फीसद की टैरिफ लगाने के फैसले की वजह से भारतीय ऑटो कंपोनेंट उद्योग पर खासा असर पड़ेगा। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार को यह घोषणा की थी कि अप्रैल से ऑटो इम्पोर्ट्स पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाएगा। इसके तहत ऑटोमोटिव पार्ट्स जैसे इंजन, ट्रांसमिशन और पावरट्रेन पार्ट्स, और इलेक्ट्रिकल कंपोनेंट्स पर भी 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाएगा।
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इन टैरिफ का भारतीय ऑटो कंपोनेंट निर्माताओं बड़ा असर देखने के लिए मिल सकता है, क्योंकि भारत से अमेरिका को ऑटो कंपोनेंट्स का निर्यात काफी बड़ी मात्रा में किया जाता है। अमेरिका का ऑटो इम्पोर्ट्स पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने की फैसले की वजह से जो असर ऑटो कंपोनेंट्स का निर्याताओं पर पड़ेगा, वह भारतीय वाहन निर्माता कंपनियों पर कम होगा। दरअसल, हाल के समय में भारत से अमेरिका को पूर्ण रूप से निर्मित कारों का निर्यात नहीं हो रहा है। इससे साफ दिखाई देता है कि भारतीय ऑटोमेकर्स के मुकाबले ऑटो कंपोनेंट्स निर्माताओं को इस टैरिफ से ज्यादा नुकसान हो सकता है। भारत ने पिछले साल (FY24) अमेरिका को ऑटो पार्ट्स (गाड़ियों के पुर्जे) के 6.79 बिलियन डॉलर यानी लगभग 6,790 करोड़ रुपये के सामान का निर्यात किया था। वहीं, अमेरिका से भारत ने 1.4 बिलियन डॉलर यानी करीब 1,400 करोड़ रुपये के ऑटो पार्ट्स खरीदे थे, जिन पर भारत ने 15% का इम्पोर्ट ड्यूटी (आयात शुल्क) लगाया था।
पहले अमेरिका भारत से आने वाले ऑटो पार्ट्स पर लगभग कोई टैक्स (ड्यूटी) नहीं लगाता था, यानी ‘निल’ या शून्य के करीब। लेकिन अब ट्रंप ने बुधवार को एक नया नियम घोषित किया है, जिसके बाद अमेरिका भारत से आने वाले पुर्जों पर भी टैक्स लगा सकता है। इसका मतलब है कि भारत के लिए अमेरिका को सामान बेचना अब महंगा और मुश्किल हो सकता है, जबकि अमेरिका से भारत को सामान खरीदने पर पहले से ही 15% टैक्स देना पड़ता है।
टाटा मोटर्स को अमेरिका का टैरिफ प्लान को बढ़ाने पर असर देखने के लिए मिल सकता है, लेकिन इसका सीधा निर्यात अमेरिका में नहीं है। इसकी सहायक कंपनी जगुआर लैंड रोवर (JLR) की अमेरिकी बाजार में अच्छी पकड़ है। JLR के वित्त वर्ष 24 की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में इसकी कुल बिक्री का 22 प्रतिशत हिस्सा था। कंपनी ने दुनिया भर में लगभग 400,000 गाड़ियां बेची, जिसमें अमेरिका में सबसे ज्यादा गाड़ियां बेची है।
वहीं, रॉयल एनफील्ड मोटरसाइकिल बनाने वाली कंपनी आयशर मोटर्स पर भी इसका असर देखने के लिए मिलेगा, क्योंकि अमेरिका में इसकी 650 सीसी मॉडल की मोटरसाइकिल की बिक्री की जाती है।
संवर्धन मदरसन इंटरनेशनल लिमिटेड पर भी असर पड़ेगा। यह कंपनी ऑटोमोटिव घटकों का निर्माण करती है, जिसमें वायरिंग हार्नेस, प्लास्टिक घटक, रियर व्यू मिरर जैसी चीजों को अमेरिका ट्रांसपोर्ट करती है।