सोशल संवाद / जमशेदपुर : मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में सही कर्मचारी नहीं मिलने पर जूनियर की मदद के लिए सीनियर को लगाया गया है। एसआईआर में मुख्य भूमिका बूथ स्तरीय अफसर (बीएलओ) की है। ये आंगनबाड़ी कर्मचारी और पारा शिक्षक हैं। कुछ सहायक शिक्षक भी लगाये गये हैं। परंतु एसआईआर में बीएलओ को मदद के लिए वोलंटियर लगाये गये हैं।

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शर्त थी कि ये भी सरकारी कर्मचारी ही होंगे। जब योग्य सरकारी कर्मचारी नहीं मिले तो पद को नजरंदाज करते हुए बीएलओ से सीनियर मिडिल और हाई स्कूलों के हेडमास्टरों को लगा दिया गया है। जाहिर है इस प्रशासनिक निर्णय से प्रधानाध्यापकों में क्षोभ देखा जा रहा है। हालांकि उन्होंने अभी तक खुलकर विरोध नहीं जताया है, परंतु उनकी नाराजगी साफ दिख रही है।
दरअसल जनगणना और एसआईआर आदि ऐसे कार्य हैं, जिनमें इनकार करने पर कार्रवाई का खतरा होता है। इसलिए कोई प्रधानाध्यापक खुलकर विरोध नहीं कर पा रहा है। इसकी वजह यह है कि यह काम सिर्फ एक महीने का है। 30 जून से 29 जुलाई तक गणना चक्र चलना है। उन्हें इसी दौरान बीएलओ के साथ रहकर फार्म बांटने और जमा लेने जैसे कार्य करना है। वैसे इसमें कुछ जूनियर इंजीनियर भी लगाये गये हैं।
प्रधानाध्यापकों को इस कार्य का प्रशिक्षण मिला है। इस वजह से उन्हें पता है कि क्या करना है। परंतु कुछ प्रधानाध्यापक निर्वाचन से जुड़े कर्मचारियों से एसओपी मांग रहे हैं। जानकार बताते हैं कि वे बहानेबाजी कर रहे हैं। चूंकि उन्हें काम नहीं करना है। माना जा रहा है कि बीएलओ को इसकी वजह से परेशानी होगी। परंतु असली परेशानी फार्म बांटने और जमा लेने में नहीं, उन्हें इसे मोबाइल ऐप में अपलोड करने में होगी।










