सोशल संवाद / डेस्क : डिजिटल युग में एक बड़ा सवाल सामने आ रहा है इंसान के जाने के बाद उसकी सोशल मीडिया पहचान का क्या होता है? अब टेक कंपनियां इस सवाल का तकनीकी समाधान खोजने में जुटी हैं। हाल ही में रिपोर्ट्स के मुताबिक, Meta ने एक ऐसा पेटेंट हासिल किया है, जो किसी व्यक्ति की मृत्यु या लंबी गैरमौजूदगी के बाद उसके सोशल मीडिया अकाउंट को AI के जरिए सक्रिय बनाए रख सकता है।

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AI बनेगा डिजिटल प्रतिनिधि?
रिपोर्ट के अनुसार, दिसंबर 2025 में Meta को एक पेटेंट मिला, जिसे 2023 में फाइल किया गया था। इस पेटेंट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित एडवांस लैंग्वेज मॉडल का जिक्र है।
यह सिस्टम यूजर के पुराने पोस्ट, कमेंट, लाइक और ऑनलाइन गतिविधियों का विश्लेषण कर उसके व्यवहार और लेखन शैली की नकल कर सकता है। यानी अगर कोई यूजर लंबे समय तक प्लेटफॉर्म से दूर रहता है या उसका निधन हो जाता है, तो AI उसकी डिजिटल मौजूदगी को उसी अंदाज में जारी रख सकता है।
क्यों जरूरी है ऐसा सिस्टम?
कंपनी के दस्तावेजों के अनुसार, जब कोई यूजर अचानक सोशल मीडिया से गायब हो जाता है तो उसके दोस्तों और परिवार पर गहरा भावनात्मक असर पड़ता है। ऐसे में AI आधारित डिजिटल प्रोफाइल उनके लिए मानसिक सहारा बन सकती है।
करीबी लोग उस व्यक्ति के डिजिटल वर्जन से संवाद कर पाएंगे, जिससे उन्हें भावनात्मक राहत मिल सकती है।
Grief Tech: तेजी से बढ़ता नया ट्रेंड
टेक इंडस्ट्री में “ग्रीफ टेक” नाम का एक नया सेक्टर उभर रहा है। इसमें ऐसी तकनीकें विकसित की जा रही हैं जो दिवंगत व्यक्ति की यादों, आवाज या व्यवहार को डिजिटल रूप में सुरक्षित रखती हैं।
Replika और You, Only Virtual जैसी कंपनियां पहले से इस दिशा में काम कर रही हैं।
इसके अलावा Microsoft ने 2021 में एक ऐसा चैटबॉट पेटेंट कराया था, जो किसी मृत व्यक्ति के व्यवहार की नकल कर सकता है। इन तकनीकों का उद्देश्य शोक संतप्त लोगों को भावनात्मक सहारा देना है।
सिर्फ मृत्यु ही नहीं, ब्रेक के दौरान भी रहेगा अकाउंट एक्टिव
यह AI सिस्टम केवल मृत्यु तक सीमित नहीं है। अगर कोई यूजर सोशल मीडिया से अस्थायी ब्रेक लेता है, तब भी AI उसके अकाउंट को सक्रिय रख सकता है। इससे फॉलोअर्स के साथ जुड़ाव बना रहेगा और एंगेजमेंट पर असर कम पड़ेगा।
क्या वाकई लागू होगा यह फीचर?
हालांकि यह विचार भविष्य की किसी साइंस फिक्शन कहानी जैसा लगता है, लेकिन Meta ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल इस पेटेंट को लागू करने की कोई आधिकारिक योजना नहीं है। टेक कंपनियां अक्सर कई कॉन्सेप्ट पर पेटेंट फाइल करती हैं, जिनमें से कई कभी प्रोडक्ट के रूप में लॉन्च नहीं होते।
AI तकनीक तेजी से बदलती दुनिया में डिजिटल पहचान को नया रूप दे रही है। अगर ऐसा सिस्टम भविष्य में लागू होता है, तो यह सोशल मीडिया और भावनात्मक जुड़ाव के मायने बदल सकता है। फिलहाल यह केवल एक संभावित टेक इनोवेशन है, लेकिन आने वाले समय में “डिजिटल अमरता” (Digital Immortality) हकीकत भी बन सकती है।










