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Sonam Wangchuk News: हाई कोर्ट का बड़ा आदेश, मेदांता अस्पताल में होंगे शिफ्ट

By Tamishree Mukherjee

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सोशल संवाद / डेस्क : 24 दिनों से अनशन पर बैठे पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने उन्हें सफदरजंग अस्पताल से मेदांता अस्पताल में शिफ्ट करने की अनुमति दे दी है। यह आदेश वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंग्मो की याचिका पर सुनवाई के बाद दिया गया।

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हाई कोर्ट ने दिया मेदांता शिफ्ट करने का आदेश

मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की खंडपीठ ने निर्देश दिया कि सोनम वांगचुक को मेदांता अस्पताल में स्थानांतरित किया जाए। अदालत ने यह भी कहा कि सफदरजंग अस्पताल में अब तक हुई सभी मेडिकल जांचों की रिपोर्ट मेदांता के डॉक्टरों को सौंपी जाए, ताकि इलाज में किसी तरह की बाधा न आए। साथ ही, मेदांता अस्पताल को वांगचुक के उपचार के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों का एक मेडिकल पैनल गठित करने का भी निर्देश दिया गया है।

केंद्र सरकार ने भी जताई सहमति

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि सरकार को सोनम वांगचुक को मेदांता अस्पताल में शिफ्ट किए जाने पर कोई आपत्ति नहीं है। हालांकि, उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि वांगचुक डॉक्टरों की सलाह के खिलाफ स्वयं अस्पताल से डिस्चार्ज न लें। अदालत ने इस पहलू को भी रिकॉर्ड में लिया।

डॉक्टरों की सलाह पर कराया गया था भर्ती

दिल्ली पुलिस के अनुसार, लंबे समय से जारी अनशन के कारण स्वास्थ्य बिगड़ने पर डॉक्टरों की सलाह और अदालत के निर्देशों के तहत सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

इससे पहले 16 जुलाई को दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया था कि अनशन के दौरान वांगचुक के स्वास्थ्य की नियमित निगरानी की जाए और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए।

पत्नी ने उठाए थे सहमति और अधिकार के सवाल

सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंग्मो की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अखिल सिब्बल ने अदालत में दलील दी कि वांगचुक को बिना पर्याप्त परामर्श या मेडिकल इमरजेंसी के सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया।

याचिका में कहा गया कि प्रत्येक मरीज को अपनी पसंद के अस्पताल में इलाज कराने का अधिकार है और वांगचुक को उनकी इच्छा के विरुद्ध किसी अस्पताल में रहने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। वांगचुक की ओर से जारी कुछ सार्वजनिक पत्रों में भी दावा किया गया था कि उन्हें उनकी सहमति के बिना अस्पताल में रखा गया है।

मामले पर सभी की नजर

अब हाई कोर्ट के आदेश के बाद सोनम वांगचुक का इलाज मेदांता अस्पताल में होगा। इस पूरे मामले पर देशभर की नजर बनी हुई है, क्योंकि यह स्वास्थ्य, नागरिक अधिकारों और लंबे समय से जारी उनके आंदोलन—तीनों से जुड़ा महत्वपूर्ण मामला है।

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