सोशल संवाद/डेस्क : “मैं विपक्ष के माननीय सदस्यों और विपक्ष के नेता द्वारा सदन के बाहर किए जा रहे प्रदर्शन की कड़ी निंदा करता हूँ।सदन का बहिष्कार करना और कार्यवाही में भाग न लेना सदन की गरिमा और संसदीय मर्यादा के पूर्णतः खिलाफ है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में सदन ही वह स्थान है जहाँ चर्चा और संवाद होना चाहिए, लेकिन विपक्ष द्वारा बजट सत्र से दूरी बनाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।
ये भी पढे : AI वकील-जज की जगह नहीं ले सकता: सुप्रीम कोर्ट जज विक्रम नाथ, सावधानी से उपयोग की दी सलाह
विशेषकर इस समय, जब दिल्ली का बजट पेश किया जा रहा है, विपक्ष की भागीदारी और उपस्थिति अत्यंत महत्वपूर्ण है। चर्चा छोड़कर बाहर प्रदर्शन करना स्थापित संसदीय परंपराओं के विरुद्ध है।
यह अत्यंत खेदजनक है कि पिछले सत्र में जब गुरुओं की बेअदबी का गंभीर मुद्दा उठा था, तब से नेता प्रतिपक्ष सदन में नहीं आईं हैं और अब भी लगातार अनुपस्थित हैं। इस प्रकार सदन की कार्यवाही में भाग न लेना और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में बाधा डालना, संवैधानिक संस्थाओं को हाइजैक करने जैसा है।
आज सदन के पटल पर कई महत्वपूर्ण रिपोर्टें पेश की गई हैं, जिन पर विपक्ष को अपना पक्ष रखना चाहिए और चर्चा में भाग लेना चाहिए। विशेषकर जब दिल्ली का बजट पेश हो रहा हो, तब विपक्ष की उपस्थिति अनिवार्य और अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। संसदीय परंपराओं के विरुद्ध जाकर सदन की गरिमा के साथ उद्दंडता करना और बार-बार चेयर (आसन) की अवमानना करना अत्यंत निंदनीय है।









