सोशल संवाद /डेस्क : जिले में संचालित UDAYM-2.0 अभियान के तहत सोमवार को जिले के सभी प्रखंडों के विभिन्न गांवों में मच्छरजनित एवं वेक्टर जनित रोगों की रोकथाम को लेकर व्यापक जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर संबंधित झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी के सदस्य, स्वास्थ्य सहिया, सामुदायिक स्वास्थ्य पदाधिकारी, एएनएम तथा स्वास्थ्य विभाग के अन्य कर्मियों द्वारा अपने-अपने संकुल संगठन, ग्राम संगठन एवं सखी मंडल स्तर पर विशेष बैठकें आयोजित की गईं।
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बैठकों में ग्रामीणों को मलेरिया, फाइलेरिया, डेंगू, जापानी इंसेफेलाइटिस, सर्पदंश तथा अन्य जहरीले कीड़े-मकौड़ों से बचाव के प्रभावी उपायों की विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई। विशेष रूप से प्रतिदिन रात्रि में सोते समय मच्छरदानी के नियमित, सही एवं समुचित उपयोग पर जोर दिया गया। ग्रामीणों को मच्छरदानी को सही तरीके से बांधने, लगाने, उसके अंदर सोने, रख-रखाव करने तथा उससे मिलने वाले स्वास्थ्य लाभों के बारे में विस्तार से बताया गया। साथ ही मच्छरदानी के सही उपयोग का व्यावहारिक प्रदर्शन भी किया गया, ताकि प्रत्येक परिवार इसे सही तरीके से अपनाकर स्वयं एवं अपने परिवार को मच्छरजनित रोगों से सुरक्षित रख सके।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित ग्रामीणों को गम्बूसिया मछली पालन के माध्यम से मच्छरों के लार्वा नियंत्रण की उपयोगिता से भी अवगत कराया गया। जल स्रोतों में गम्बूसिया मछली के संरक्षण एवं आवश्यकतानुसार उसके पालन की दिशा में सामुदायिक पहल करने पर चर्चा की गई। इसके अतिरिक्त स्वच्छ परिवेश बनाए रखने, घरों एवं आसपास जल जमाव नहीं होने देने, साफ-सफाई बनाए रखने तथा मच्छरों के प्रजनन स्थलों को नष्ट करने जैसे व्यवहार परिवर्तन संबंधी उपायों पर विशेष बल दिया गया।
बैठक में स्वास्थ्य कर्मियों एवं जेएसएलपीएस प्रतिनिधियों ने ग्रामीणों से अपील की कि वे मच्छरजनित रोगों की रोकथाम को केवल सरकारी अभियान न मानकर जनआंदोलन के रूप में आगे बढ़ाएं। प्रत्येक परिवार नियमित रूप से मच्छरदानी का उपयोग करे तथा अपने पड़ोसियों एवं समुदाय के अन्य लोगों को भी इसके लिए प्रेरित करे। सामूहिक सहभागिता एवं जनजागरूकता से ही मलेरिया, डेंगू, फाइलेरिया एवं अन्य वेक्टर जनित रोगों पर प्रभावी नियंत्रण संभव है।









