सोशल संवाद / रांची : झारखंड हाइकोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने चौथे चरण में अंगीभूत किये गये कॉलेजों के शिक्षकेत्तर कर्मियों की याचिका पर सुनवाई के बाद बड़ी राहत दी है. अदालत ने कर्मियों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि विश्वविद्यालय द्वारा नियमित तथा समाहित किये जा चुके कर्मियों को वेतन पुनरीक्षण का लाभ देने से राज्य सरकार इंकार नहीं कर सकती है.
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इन कर्मियों को पांचवां, छठा तथा सातवें वेतनमान का लाभ मिलना उनका वैधानिक अधिकार है. अदालत ने राज्य सरकार के आदेश को निरस्त कर दिया, जिसके माध्यम से प्रार्थी के वेतन पुनरीक्षण के दावे को अस्वीकार किया गया था.
कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया कि वह वेतन आयोगों की अनुशंसाओं का लाभ प्रदान करे तथा बकाया वेतन राशि का भी भुगतान सुनिश्चित की जाये. अदालत ने माना कि समान परिस्थितियों वाले अन्य कर्मचारियों को पहले ही लाभ दिया जा चुका है, इसलिए वर्तमान प्रार्थी को लाभसे वंचित रखना मनमाना और भेदभावपूर्ण है.
हाइकोर्ट ने कहा: नियमित व समाहित कर्मचारियों को वेतन पुनरीक्षण का लाभ देने से सरकार इंकार नहीं कर सकती










