सोशल संवाद / डेस्क : भारत-बांग्लादेश के बीच 1996 में हुए फरक्का गंगा जल बंटवारा समझौते के 30 वर्ष पूरे होने जा रहे हैं। इससे पहले बक्सर सांसद सुधाकर सिंह ने बिहार के जल, नौवहन और आर्थिक हितों को लेकर केंद्र सरकार के समक्ष कई महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं। उन्होंने कहा कि आगामी समीक्षा बिहार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और राज्य के हितों को वार्ता में प्रमुखता से शामिल किया जाना चाहिए।
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फरक्का समझौते में बिहार को हितधारक बनाने की मांग
सुधाकर सिंह ने कहा कि बिहार एक लैंडलॉक्ड राज्य है और गंगा नदी उसके लिए समुद्र तक पहुंचने का महत्वपूर्ण प्राकृतिक एवं किफायती मार्ग है। गंगा के जरिए बिहार को हल्दिया और कोलकाता बंदरगाहों से जोड़ने के साथ-साथ राष्ट्रीय जलमार्ग-1 के माध्यम से व्यापार और नौवहन को बढ़ावा दिया जा सकता है।
उन्होंने मांग की कि भारत-बांग्लादेश गंगा जल वार्ता में बिहार को औपचारिक हितधारक बनाया जाए और भविष्य में किसी भी नए या संशोधित समझौते से पहले सभी गंगा बेसिन राज्यों की सहमति सुनिश्चित की जाए।
गंगा में घटते जल प्रवाह पर चिंता
पत्र में बिहार में गंगा के घटते जल प्रवाह को लेकर भी चिंता जताई गई है। इसमें बिहार राज्य सिंचाई आयोग के पुराने अध्ययनों का हवाला देते हुए फरवरी, मार्च और अप्रैल के दौरान जल उपलब्धता में कमी का उल्लेख किया गया है।
सुधाकर सिंह का कहना है कि एक ओर बिहार को गर्मी के मौसम में पर्याप्त जल नहीं मिल पाता, वहीं दूसरी ओर मानसून के दौरान बाढ़ और कटाव की गंभीर समस्या का सामना करना पड़ता है। उन्होंने ऊपरी राज्यों में जल के उपयोग और नई परियोजनाओं की मंजूरी को लेकर भी पारदर्शी व्यवस्था की मांग की।
सभी आठ गंगा बेसिन राज्यों को शामिल करने की मांग
पत्र में 24 जनवरी 1997 की सचिव-स्तरीय बैठक का भी उल्लेख किया गया है। इसके आधार पर मांग की गई है कि गंगा जल के बंटवारे और उपयोग को लेकर सभी आठ गंगा बेसिन राज्यों को शामिल करते हुए औपचारिक तंत्र बनाया जाए।
सुधाकर सिंह ने कहा कि जब तक गंगा में उपलब्ध कुल जल और विभिन्न राज्यों की जरूरतों का वैज्ञानिक आकलन कर हिस्सेदारी तय नहीं होती, तब तक ऊपरी राज्यों की नई जल परियोजनाओं की मंजूरी पर रोक लगाने पर विचार किया जाना चाहिए।
बिहार में सालभर नौवहन योग्य जल की मांग
बिहार के आर्थिक और व्यापारिक हितों को देखते हुए राष्ट्रीय जलमार्ग-1 पर बक्सर और पटना तक वर्षभर कम से कम 2.5 से 3 मीटर की गारंटीड नौवहन गहराई सुनिश्चित करने की मांग की गई है।
इसके अलावा बक्सर, पटना, सारण, भागलपुर, मोकामा, मुंगेर और कटिहार जैसे क्षेत्रों में आधुनिक मल्टी-मॉडल टर्मिनल और पोर्ट विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया है। इन केंद्रों को रेल और राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क से जोड़ने की भी मांग की गई है।
सिल्ट और बाढ़ की समस्या के समाधान पर जोर
पत्र में गंगा में गाद की समस्या के स्थायी समाधान के लिए वैज्ञानिक डिसिल्टेशन, ड्रेजिंग और रिवर ट्रेनिंग की व्यवस्था विकसित करने की मांग की गई है। साथ ही ऊपरी राज्यों और नेपाल में जलाशयों में फ्लड-कुशन का प्रावधान सुनिश्चित करने की बात कही गई है, ताकि बिहार में बाढ़ के प्रभाव को कम किया जा सके।
सप्तकोशी हाई डैम परियोजना को प्राथमिकता देने की मांग
सुधाकर सिंह ने नेपाल के बराह क्षेत्र में प्रस्तावित सप्तकोशी हाई डैम परियोजना को जल्द आगे बढ़ाने की मांग भी की है। उनका कहना है कि इस परियोजना को प्राथमिकता देकर बिहार और पूरे गंगा बेसिन में जल उपलब्धता तथा बाढ़ प्रबंधन से जुड़े दीर्घकालिक हितों को मजबूत किया जा सकता है।
बिहार के लिए क्यों महत्वपूर्ण है 2026 की समीक्षा?
सुधाकर सिंह ने दिसंबर 2026 में होने वाली फरक्का समझौते की समीक्षा को बिहार के लिए ऐतिहासिक अवसर बताया है। उन्होंने केंद्र से बिहार सरकार और राज्य के जनप्रतिनिधियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक आयोजित करने तथा बिहार की मांगों को समीक्षा प्रक्रिया के आधिकारिक दस्तावेजों में शामिल करने का आग्रह किया है।
उन्होंने कहा कि गंगा बिहार के लिए केवल सिंचाई और पेयजल का स्रोत नहीं, बल्कि राज्य के व्यापार, नौवहन और आर्थिक विकास से जुड़ी महत्वपूर्ण जीवनरेखा है। ऐसे में आगामी समीक्षा में बिहार के हितों को प्रभावी तरीके से उठाना जरूरी है।









